UP Smart Meter News: अब बिना सहमति नहीं लगेगा प्रीपेड मीटर!

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर सामने आ रही हैं| पिछले काफी समय से स्मार्ट प्रीपेड मीटर (Smart Prepaid Meter) को लेकर चल रहे विवाद और जनता के भारी विरोध के बीच राज्य सरकार और पावर कार्पोरेशन ने अपने रुख में नरमी दिखाई हैं| अब प्रदेश में किसी भी उपभोक्ता के घर पर उसकी सहमति के बिना स्मार्ट प्रीपेड मीटर नहीं लगाया जाएगा|
यह निर्णय उन शिकायतों के बाद आया हैं जिनमें बिजली विभाग के कर्मचारियों पर जबरन मीटर थोपने और उपभोक्ताओं के साथ बदसलूकी करने के गंभीर आरोप लगे थे| आईए विस्तार से समझते हैं कि आखिर यह पूरा विवाद क्या हैं और नए नितं आपके लिए कैसे फायदेमंद हैं|
1. विवाद की मुख्य वजह: जबरन मीटर लगाने का आरोप:-
उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों जैसे मेरठ, वाराणसी, लखनऊ और कानपूर से ऐसी खबरें आ रही थीं कि बिजली विभाग की टीमें पुलिस बल के साथ मिलकर घरों में घुस रही हैं और पुराने मीटरों को उखाड़कर नए स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगा रही हैं|
- जनता का आक्रोश:- उपभोक्ताओं का आरोप हैं कि उन्हें बिना किसी पूर्व सुचना के नए मीटर दिए जा रहे हैं|
- कर्मचारियों की मनमानी:- कई जगहों पर कर्मचारियों द्वारा बिजली काटने की धमकी देकर मीटर लगवाने के मामले सामने आए|
- तकनीकी खामियाँ:- पुराने मीटरों की तुलना में नए प्रीपेड मीटरों में तेज रीडिंग और ज्यादा बिल आने की शिकायतें आम हो गई हैं|
2. क्या हैं सरकार का नया निर्देश:-
उपभोक्ताओं के बढ़ते गुस्से और कर्मचारी संगठनों के विरोध को देखते हुए बिजली विभाग के उच्चाधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं:
“किसी भी उपभोक्ता के परिसर में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने से पहले उसकी लिखित या मौखिक सहमति लेना अनिवार्य होगा| यदि उपभोक्ता तैयार नहीं हैं, तो उसे इसके फायदों के बारे में समझाया जाए, लेकिन जबरदस्ती नहीं की जाएगी|”
मुख्य दिशा-निर्देश:-
- परामर्श सत्र:- मीटर लगाने से पहले विभाग को उपभोक्ताओं के साथ बैठकें करनी होंगी|
- शिकायत निवारण:- अगर किसी को लगता हैं कि पुराना मीटर सही था, तो उसकी जांच की जाएगी|
- पारदर्शिता:- मीटर बदलने की प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी|
3. स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर उपभोक्ताओं का डर क्यों?:-
उत्तर प्रदेश की जनता आखिर इन मीटरों से इतना डर क्यों रही हैं? इसके पीछे कुछ ठोस कारण हैं:
- बैलेंस खत्म होते ही बिजली गुल:- प्रीपेड सिस्टम में जैसे ही आपका रिचार्ज खत्म होगा, बिजली अपने आप कट जाएगी| ग्रामीण इलाकों में जहाँ इंटरनेट या रिचार्ज की सुविधा हर समय उपलब्ध नहीं होता, वहां यह एक बड़ी समस्या हैं|
- अतिरिक्त शुल्क:- कई लोगों को लगता हैं कि स्मार्ट मीटर में ‘हिडन चार्ज’ (Hidden Charges) होते हैं|
- रीडिंग की गति:- आम धारणा बन गई हैं कि स्मार्ट मीटर पुराने इलेक्ट्रोमैकेनिकल मीटरों की तुलना में 10% से 20% अधिक तेज चलते हैं|
4. बिजली विभाग का पक्ष: स्मार्ट मीटर के फायदे:-
हालांकि जनता विरोध कर रही हैं, लेकिन सरकार और यूपीपीसीएल (UPPCL) का तर्क हैं कि यह व्यवस्था बिजली चोरी रोकने और घाटे को कम करने के लिए ज़रूरी हैं| विभाग के अनुसार इसके निम्नलिखित फायदे हैं:
- सटीक बिलिंग:- इसमें मानवीय हस्तक्षेप कम होगा, जिससे गलत बिल आने की समस्या खत्म हो जाएगी|
- बजट नियंत्रण:- उपभोक्ता अपने मोबाइल एप के जरिए यह देख पाएँगे कि कितनी बिजली खर्च हो रही हैं और वे अपने बजट के अनुसार रिचार्ज कर सकेंगे|
- डिस्काउंट:- सरकर प्रीपेड ग्राहकों को बिल में कुछ प्रतिशत की छुट देने की योजना पर भी विचार कर रही हैं|
5. कर्मचारी संघों का विरोध भी जारी:-
हैरानी की बात यह हैं कि केवल जनता ही नहीं, बल्कि बिजली विभाग के कर्मचारी और अभियंता संघ भी इन स्मार्ट मीटरों का विरोध कर रहे हैं| उनका मानना हैं कि:
- निजी कंपनियों को इसका ठेका देने से विभाग का निजीकरण बढ़ रहा हैं|
- मीटरों की गुणवत्ता मानक के अनुरूप नहीं हैं|
- फिल्ड पर काम करने वाले कर्मचारियों को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ता हैं, जिससे उनकी सुरक्षा को खतरा हैं|
6. उपभोक्ताओं के लिए क्या हैं सलाह:-
यदि आपके घर पर भी बिजली विभाग की टीम मीटर लगाने आती हैं, तो आपको अपने अधिकारों का पता होना चाहिए:
- ID कार्ड मांगे:- काम करने आए कर्मचारियों से उनका पहचान पत्र मांगें|
- सहमति पत्र:- अगर आप अभी तैयार नहीं हैं, तो आप विनम्रता से मना कर सकते हैं और विभागीय नियमों का हवाला दे सकते हैं|
- पुराने बिल का हिसाब:- मीटर बदलवाने से पहले अपने पुराने मीटर की आखिरी रीडिंग की फोटो जरुर खींच लें और बकाया बिल का भुगतान क्लियर रखें|
7. यूपी बिजली विभाग (UPPCL) हेल्पलाइन और शिकायत केंद्र:-
अगर आपको स्मार्ट मीटर या बिजली बिल से संबंधित कोई भी समस्या हैं, तो आप अपने क्षेत्र के अनुसार निम्नलिखित नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:
(क). डिस्कॉम-वार टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर (24/7 उपलब्ध):-
उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं:
- पूर्वांचल (वाराणसी, गाजीपुर, प्रयागराज आदि): 1800 – 180 – 5025
- पश्चिमांचल (मेरठ, नोएडा, गाजियाबाद आदि): 1800 – 180 – 3002
- मध्यांचल (लखनऊ, अयोध्या, बरेली आदि): 1800 – 180 – 1912
- दक्षिणांचल (आगरा, कानपूर, झाँसी आदि): 1800 – 180 – 3023
- पुरे प्रदेश के लिए सामान्य हेल्पलाइन: 1912 (किसी भी जिले से डायल करें)
(ख). ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने के माध्यम:-
आजकल डिजिटल माध्यम से शिकायत करना और उसका समाधान पाना काफी आसान हो गया हैं:
- आधिकारिक वेबसाइट: आप UPPCL की वेबसाइट पर जाकर अपनी शिकायत ऑनलाइन रजिस्टर कर सकते हैं|
- ट्विटर (X) हैंडल:- अपनी समस्या लिखकर @UPPCLLKO या अपने क्षेत्र से डिस्कॉम (जैसे @puvvnlhq) को टैग करें| यहाँ शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की जाती हैं|
- मोबाइल एप:- ‘UPPCL Consumer App’ को प्ले स्टोर से डाऊनलोड करके भी मीटर और बिलिंग संबंधी विवरण देखे जा सकते हैं|
(ग). महत्वपूर्ण संपर्क सूत्र (मुख्यालय):-
यदि स्थानीय स्तर पर आपकी सुनवाई नहीं होती हैं, तो आप उच्चाधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं:
विभाग/पद – स्थान – संपर्क का माध्यम
शक्ति भवन (मुख्यालय) – लखनऊ – 0522 – 2287525
उपभोक्ता सेवा केंद्र – लखनऊ – 1912
स्मार्ट मीटर सेल – लखनऊ – helpdesk@uppcl.org
शिकायत दर्ज करते समय इन बातों का ध्यान रखें:-
- अपना Account ID (उपभोक्ता संख्या) हमेशा तैयार रखें|
- स्मार्ट मीटर की समस्या होने पर मीटर नंबर और उसकी रीडिंग का फोटो पास रखें|
- शिकायत दर्ज करने के बाद शिकायत संख्या (Complaint Number) जरुर नोट करें ताकि भविष्य में उसे ट्रैक किया जा सके|
जनहित या राजस्व:-
अंततः, स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना का मुख्य उद्देश्य बिजली चोरी को रोकना और विभाग के घाटे को कम करना हैं| लेकिन, किसी भी तकनीकी सुधार को सफल बनाने के लिए जनता का सहयोग अनिवार्य हैं| उत्तर प्रदेश सरकार का ‘बिना सहमति मीटर न लगाने’ का फैसला यह दर्शाता हैं की सरकार अब चुनावी और सामाजिक दबाव को समझते हुए फूंक-फूंक कर कदम रख रही हैं|
कर्मचारियों पर ‘जबरन’ मीटर लगाने के आरोपों की जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए| बिजली एक बुनियादी सुविधा हैं, और इसे डिजिटल बनाने की प्रक्रिया पारदर्शी और उपभोक्ता-हितैषी होनी चाहिए| यदि विभाग अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करता हैं, तो निश्चित रूप से यह योजना उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था के लिए ‘मील का पत्थर’ साबित होगी|