जखनियां: महिला आरक्षण पर पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र का बड़ा बयान; अखिलेश यादव को दी नसीहत, बोले-‘संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान सर्वोपरि’

जखनियां: महिला आरक्षण पर पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र का बड़ा बयान;

पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र जखनियां गाजीपुर में संबोधन देते हुए
गाजीपुर के जखनियां पहुंचे पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र ने प्रबुद्ध वर्ग को संबोधित किया|

गाजीपुर (जखनियां):- उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के जखनियां क्षेत्र में एक निजी कार्यक्रम में पहुंचे राजस्थान के पूर्व राज्यपाल और भारतीय राजनीति के दिग्गज नेता कलराज मिश्र ने देश के ज्वलंत मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी| उन्होंने विशेष रूप से ‘महिला आरक्षण बिल’ और विपक्षी नेताओं द्वारा संवैधानिक संस्थाओं पर की जा रही टिप्पणियों को लेकर कड़ा रुख अपनाया|

कलराज मिश्र ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेख यादव का नाम लिए बिना उन्हें राजनीति में मर्यादा और संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान की नसीहत दी| आईए जानते हैं जखनियां में दिए गए उनके इस संबोधन की मुख्य बातें और इसके राजनीतिक मायने|

1. महिला आरक्षण: ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ एतिहासिक कदम:-

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कलराज मिश्र ने केंद्र सरकार द्वारा पारित महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) की जमकर सराहना की| उन्होंने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि भारत की आधी आबादी को उनका वास्तविक अधिकार देने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम हैं|

  • सशक्तिकरण का नया युग:- उन्होंने कहा की पंचायतों और नगर निकायों के बाद अब विधानसभा और लोकसभा में महिलाओं की 33% भागीदारी सुनिश्चित होने से देश की नीति निर्धारण प्रक्रिया में व्यापक बदलाव आएगा|
  • विकास में भागीदारी:- पूर्व राज्यपाल के अनुसार, जब महिलाएं कानून बनाने की प्रक्रिया में सीधे तौर पर शामिल होंगी, तभी देश का सर्वागीण विकास संभव हैं| उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरगामी सोच का परिणाम बताया|

2. अखिलेश यादव को नसीहत: संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान ज़रूरी:-

कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए कलराज मिश्र ने विपक्षी दलों, विशेषकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा हल के दिनों में चुनाव आयोग, न्यायपालिका और राज्यपाल जैसे पदों पर की गई टिप्पणियों पर अपनी नाराजगी जताई|

  • पद की गरिमा:- उन्होंने कहाँ, “लोकतंत्र में असहमति का अधिकार सबको हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि आप संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाएं| जो लोग खुद सत्ता में रहें हैं, उन्हें इन संस्थाओं की मर्यादा का ज्ञान होना चाहिए|
  • राजनीतिक परिपक्वता:- उन्होंने नसीहत देते हुए कहा की नेताओं को भाषा की मर्यादा नहीं भूलनी चाहिए| संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों या संस्थाओं को राजनीति के केंद्र में खींचना स्वस्थ लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं हैं|

3. जखनियां का दौरा और स्थानीय कार्यकर्ताओं में उत्साह:-

कलराज मिश्र का गाजीपुर और जखनियां से पुराना नाता रहा हैं| उनके आगमन पर स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध जनों ने उनका भव्य स्वागत किया|

  • कार्यकर्ताओं को मंत्र:- उन्होंने कार्यकर्ताओं से संवाद करते हुए कहा कि राजनीति सेवा का माध्यम हैं, शक्ति प्रदर्शन का नहीं| उन्होंने आह्वान किया कि सरकार की योजनाओं को समज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का काम करें|
  • गाजीपुर का महत्व:- गाजीपुर की धरती को वीरों और विद्वानों की धरती बताते हुए उन्होंने यहाँ के विकास और यहाँ की राजनीतिक चेतना की प्रशंसा की|

4. संवैधानिक संस्थाओं पर बार-बार उठते सवाल: एक गंभीर विश्लेषण:-

इस अनुभाग में हम विस्तार से समझेंगे कि आखिर क्यों कलराज मिश्र ने संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान की बात कही|

पिछले कुछ समय से भारत की राजनीति में एक नई प्रवृत्ति देखि गई हैं जहाँ हार का ठीकरा अक्सर ईवीएम (EVM), चुनाव आयोग या अदालतों पर फोड़ा जाता हैं| कलराज मिश्र का इशारा इसी ओर था कि संस्थाएं किसी व्यक्ति विशेष की नहीं बल्कि पुरे देश की होती हैं| यदि जनता का विश्वास इन संस्थाओं से उठ गया, तो लोकतंत्र की नींव कमजोर हो जाएगी|

5. महिला आरक्षण के कार्यान्वयन में देरी पर विपक्ष के वार का जवाब:-

विपक्ष लगातार यह सवाल उठा रहा हैं कि महिला आरक्षण 2026 या उसके बाद की जनगणना और परिसीमन के बाद ही क्यों लागू होगा, इस पर कलराज मिश्र ने स्पष्ट किया:

“किसी भी बड़े संवैधानिक बदलाव के लिए एक क़ानूनी प्रक्रिया होती हैं| जनगणना और परिसीमन (Delimitation) एक अनिवार्य प्रक्रिया हैं ताकि आरक्षण का लाभ पारदर्शी तरीके से सही क्षेत्रों को मिल सके| इसमें राजनीति ढूँढना गलत हैं|”

6. कलराज मिश्र का राजनीतिक सफर: एक आदर्श जननेता:-

कलराज मिश्र केवल एक पूर्व राज्यपाल नहीं हैं, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति के ‘भीष्म पितामह’ माने जाते हैं| गाजीपुर और पूर्वांचल की धरती से उनका गहरा लगाव रहा हैं|

  • संगठन में भूमिका:- वह उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष रह चुके हैं और उन्होंने उस दौर में पार्टी को खड़ा किया जब चुनौतियाँ बहुत बड़ी थीं|
  • संसदीय अनुभव:- केंद्र में मंत्री के रूप में उन्होंने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्दम (MSME) मंत्रालय को नई ऊंचाईयां दीं|
  • संवैधानिक मर्यादा:- राज्यपाल के रूप में हिमाचल प्रदेश और राजस्थान में उनका कार्यकाल निष्पक्षता और संवैधानिक नियमों के पालन के लिए जाना जाता हैं| यही कारण हैं कि जखनियां में दिया गया उनका ‘नसीहत’ भरा बयान राजनीतिक गलियारों में गंभीरता से लिया जा रहा हैं|

7. अम्हिला आरक्षण: विपक्ष की आपत्तियों का विस्तृत विश्लेषण:-

विपक्ष (सपा, कांग्रेस आदि) का ट्रक हैं कि महिला आरक्षण को तुरंत (Immediate) लागू किया जाना चाहिए| इस पर कलराज मिश्र का विस्तृत तर्क यह हैं:

  1. परिसीमन (Delimitation):- बिना क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण के यह तय करना मुश्किल होगा कि कौन सी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी|
  2. जनगणना:- 2021 की जनगणना जो किन्हीं कारणों से टल गई गई थी, उसे आधार बनाना ज़रूरी हैं ताकि जनसंख्या के सही अनुपात में प्रतिनिधित्व मिल सके|
  3. ओबीसी कोटा:- विपक्ष द्वारा ‘कोटे के अंदर कोटा’ की मांग पर कलराज मिश्र का मानना हैं कि मांग पर कलराज मिश्र का मानना हैं कि पहले मूल ढांचे को लागू करना प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इसमें सुधार की गुंजाईश बनी रहे|

8. जखनियां और गाजीपुर की राजनीति पर असर:-

गाजीपुर जिला हमेशा से ही राजनीतिक रूप से बहुत सक्रिय रहा हैं| जखनियां क्षेत्र में कलराज मिश्र का आना आगामी स्थानीय चुनावों और 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी के रूप में भी देखा जा रहा हैं|

  • प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन:- उनके इस दौरे का मुख्य उद्देश्य प्रबुद्ध वर्ग (Teachers, Doctors, Advocates) को भाजपा की विचारधारा और केंद्र की नीतियों से जोड़ना था|
  • अखिलेश यादव पर निशाना:- गाजीपुर सपा का मजबूत गढ़ माना जाता हैं, ऐसे में यहाँ आकर अखिलेश यादव को नसीहत देना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हैं ताकि सपा के प्रभाव को कम किया जा सके|

9. संवैधानिक संस्थाओं के अपमान का खतरा: एक शोधपरक चर्चा:-

कलराज मिश्र ने ‘लोकतंत्र की हत्या’ जैसे नारों पर चिंता जताई| उन्होंने विस्तार से समझाया कि:

  • यदि चुनाव आयोग पर सवाल उठते हैं, तो जनता का मतदान से भरोसा उठ जाएगा|
  • यदि राज्यपाल के पद को केवल ‘केंद्र का एजेंट’ कहा जाएगा, तो राज्य और केंद्र के संबंध खराब होंगे|
  • नेताओं को व्यक्तिगत हमलों के बजाय नीतिगत विरोध (Policy Opposition) करना चाहिए|

मर्यादा और विकास का संगम:-

कलराज मिश्र का जखनियां दौरा केवल एक औपचारिक दौरा नहीं था, बल्कि उन्होंने इसके जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि विकास के साथ-साथ लोकतांत्रिक मूल्यों का संरक्षण भी ज़रूरी हैं| महिला आरक्षण जहाँ देश के सामाजिक ढांचे को मजबूत करेगा, वहीं संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान राजनीतिक ढांचे को स्थिर रखेगा|

अखिलेश यादव जैसे युवा नेताओं को अनुभवी राजनीतिज्ञों की इन बातों पर विचार करना चाहिए ताकि उत्तर प्रदेश की राजनीति गाली-गलौज या आरोपों से हटकर विकास और नीतिगत मुद्दों पर केंद्रित हो सके|

 

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