गाजीपुर में बिजली का हाहाकार: 44 डिग्री पारा और फूंकते ट्रांसफार्मर, जनता त्रस्त

गाजीपुर में बिजली का हाहाकार: 44 डिग्री पारा और फूंकते ट्रांसफार्मर

गाजीपुर में जले हुए ट्रांसफार्मर के पास खड़े परेशान ग्रामीण
भीषण गर्मी के बीच ट्रांसफार्मर फुंकने से गाजीपुर के गाँवों में अंधेरा| Photo: AI Generated 

गाजीपुर, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में इन दिनों सूरज की तपिश और बिजली विभाग की बदहाली ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया हैं| अप्रैल के महीने में ही तापमान 44 डिग्री सेल्सियस को छू रहा हैं, और ऐसे में बिजली की अघोषित कटौती ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया हैं| जिले के शहरी इलाकों से लेकर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक, हर तरफ बिजली के लिए हाहाकार मचा हुआ हैं| कहीं लो-वोल्टेज की समस्या हैं, तो कहीं ओवरलोड के कर्ण ट्रांसफार्मर आग के गोले बन रहे हैं| गाजीपुर की जनता इस समय दोहरी मार झेल रही हैं – एक तरफ कुदरत का कहर और दूसरी तरफ बिजली विभाग की लापरवाही|

गाजीपुर का कटरिया कांड: न्याय की मांग या राजनीति की भेंट?

गर्मी का ‘सुपरफ़ूड’: लू और बीमारी को पास नही भटकनें देंगी ये 5 चींजे, आज ही डाइट में शामिल करें

भीषण गर्मी और लू का कहर: केवल पानी पीना काफी नहीं! खुद को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए अपनाएं ये 5 अचूक तरीके

काशी का कायाकल्प: रु.2,642 करोड़ का ‘सिग्नेचर ब्रिज’ बनेगा वाराणसी की नई लाइफलाइन

भीषण गर्मी और रिकॉर्ड तोड़ मांग:-

इस साल गाजीपुर में गर्मी ने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं| सुबह 9 बजे से ही लू के थपेड़े चलने लगते हैं, जिससे पंखे और कूलर भी फेल हो रहे हैं| इस भीषण गर्मी के कारण जिले में बिजली की मांग में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई हैं| विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल के मुकाबले इस बार बिजली की खपत में करीब 35 प्रतिशत का इजाफा हुआ हैं| लोग गर्मी से बचने के लिए लगातार एसी और हैवी कूलर का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसका सीधा असर जर्जर ग्रिड और पुराने ट्रांसफार्मरों पर पड़ रहा हैं|’

जमानियां और मोहम्मदाबाद का बुरा हाल:-

बिजली संकट का सबसे बुरा असर गाजीपुर के जमानियां, मोहम्मदाबाद और सैदपुर जैसे तहसील क्षेत्रों में देखा जा रहा हैं| ओवरलोडिंग के कारण पिछले एक हफ्ते में जिले में दर्जनों ट्रांसफार्मर जल चुके हैं| मोहम्मदाबाद के कई गाँवों में तो स्थिति यह चुके हैं| मोहम्मदाबाद के कई गाँवों में तो स्थिति यह हैं कि ट्रांसफार्मर जलने के तीन-तीन दिन बाद भी उन्हें बदला नहीं जा सका हैं| ग्रामीणों का आरोप हैं कि विभाग के चक्कर काटने के बावजूद ‘स्टॉक नहीं हैं’ का बहाना बनाकर उन्हें टाल दिया जाता हैं| रात-रात भर लोग अंधेरे में और मच्छरों के बीच काटने को मजबूर हैं|

अघोषित कटौती: कागजों पर 24 घंटे, जमीन पर 8 घंटे:-

उत्तर प्रदेश सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि जिला मुख्यालय को 24 घंटे और तहसील मुख्यालयों को 20-22 घंटे बिजली दी जाए| लेकिन गाजीपुर की हकीकत इससे कोसों दूर हैं| शहर में भी दिन भर में 15 से 20 बार ट्रिपिंग होती हैं| ग्रामीण क्षेत्रों में तो स्थिति और भी भयावह हैं, जहाँ मुश्किल से 8-10 घंटे ही बिजली मिल पा रही हैं| सबसे बड़ी समस्या यह हैं कि यह कटौती किसी तय शेड्यूल के तहत नहीं होती| जब मन आता हैं, पावर हॉउस से सप्लाई काट दी जाती हैं, जिससे बच्चों की पढाई और बुजुर्गो की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा हैं|

लो-वोल्टेज की मार और फूंकते घरेलू उपकरण:-

बिजली मिलने पर भी वह इस्तेमाल के लायक नहीं होती| जिले के कई इलाकों से लो-वोल्टेज की शिकायतें आ रही हैं| लो-वोल्टेज की कारण लोगों के कीमती इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे फ्रिज, वाटर पंप और स्टेबलाइजर जल रहे हैं| किसानों के लिए यह समस्या दोहरी मार लेकर आई हैं| फसलों की अंतिम सिंचाई के लिए नलकूप नहीं चल पा रहे हैं, जिससे सूखती फसलों को देख किसानों की आँखों में आँसू हैं| वोल्टेज इतना कम रहता हैं कि एक बल्ब भी ठीक से नहीं जल पाता, कूलर से ठंडी हवा मिलना तो दूर की बात हैं|

पेयजल संकट: बिजली गायब तो पानी भी गायब:-

बिजली संकट का सीधा असर अब जिले की पेयजल व्यवस्था पर पड़ने लगा हैं| गाजीपुर शहर के कई मोहल्लों में ट्यूबवेल न चल पाने के कारण पानी की सप्लाई ठप पड़ी हैं| लोग सुबह-सुबह हैंडपंपों पर लंबी कतारों में खड़े नजर आते हैं| जो लोग वाटर प्यूरीफायर (RO) पर निर्भर हैं, उन्हें पीने के पानी के लिए बाहर से बोतलें खरीदनी पड़ रही हैं| बिजली विभाग और जलकल विभाग के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा आम जनता को अपनी प्याज बुझाकर भुगतना पड़ रहा हैं|

जर्जर तार और फाल्ट: विभाग की सुस्ती:-

विभाग के आला अधिकारीयों का कहना हैं कि वे स्थिति को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हकीकत यह हैं कि कई जगहों पर तार इतने पुराने और लटके हुए हैं कि हल्की हवा चलने पर भी शार्ट सर्किट हो जाता हैं| विभाग के पास ग्राउंड स्टाफ की भारी कमी हैं, जिसके कारण एक मामूली फाल्ट ठीक होने में 4 से 5 घंटे लग जाते हैं| जब तक एक जगह का फाल्ट ठीक होता हैं, दूसरी जगह का तार टूट जाता हैं|

व्यापारियों और लघु उद्योगों पर आर्थिक संकट:-

बिजली की इस लुकाछिपी ने गाजीपुर के व्यापारियों की कमर तोड़ दी हैं| बर्फ की फैक्ट्रियां, कोल्ड स्टोरेज और छोटे कारखाने बंद होने की कगार पर हैं| शादी-ब्याह के इस सीजन में जेनरेटर का खर्च व्यापारियों का मुनाफा निगल रहा हैं|दुकानदारों का कहना हैं कि बिजली न रहने से शोरुम में ग्राहक नहीं रुकते, जिससे व्यापार में 40 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई हैं|

जनता का आक्रोश: पावर हाउसों पर प्रदर्शन:-

बिजली संकट से तंग आकर अब जनता का धैर्य जवाब दे रहा हैं| पिछले दिनों जमानियां और जंगीपुर में ग्रामीणों ने पावर हॉउस का घेराव किया और विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की| लोगो की मांग हैं कि उन्हें रोस्टर के अनुसार बिजली दी जाए और पुराने जर्जर तारों को बदला जाए| यदि स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी गई हैं|

राजनीतिक गर्माहट और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी:-

बिजली का यह मुद्दा अब राजनीति गलिय्रोमे भी गूंज रहा हैं| स्थानीय लोग अपने जनप्रतिनिधियों (संसद और विधायकों) की चुप्पी पर सवाल उठा रहे हैं| सोशल मीडिया पर लोग अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं और सरकार से गाजीपुर की बिजली व्यवस्था को प्राथमिकता पर ठीक करने की अपील कर रहे हैं|

समाधान की राह: क्या करना होगा:-

गाजीपुर के बिजली संकट को दूर करने के लिए प्रशासन को कुछ कड़े कदम उठाने होंगे|

  1. क्षमता वृद्धि:- ओवरलोडेड पावर हाउसों की क्षमता को तत्काल बढ़ाना होगा|
  2. एबी केबलिंग:- जर्जर तारों को हटाकर कवर वाले केबल लगाने होंगे ताकि ट्रिपिंग कम हो|
  3. अवैध कनेक्शन पर लगाम:- कटिया कनेक्शनों के कारण होने वाले लोड को रोकना होगा|
  4. त्वरित शिकायत निवारण:- जले हुए ट्रांसफार्मरों को 24 घंटे के भीतर बदलने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी|

:- गाजीपुर में बिजली का यह संकट केवल एक तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर मानवीय समस्या बन चूका हैं| प्रशासन को चाहिए कि वे गाजीपुर की जनता की इस तकलीफ को गंभीरता से लें| जब तक बिजली व्यवस्था सुचारू नहीं होगी, तब तक भीषण गर्मी की यह तपिश जनता को ऐसे ही झुलसाती रहेगी|

 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Exit mobile version