PM मोदी की बड़ी अपील के बाद पेट्रोलियम मंत्रालय का बयान
देश में बढ़ते वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की बचत करने तथा एक साल तक सोना खरीदने से बचने की अपील की| पीएम मोदी की इस अपील के अगले ही दिन पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से भी बड़ा बयान सामने आया, जिसमें लोगों से ईंधन बचाने की अपील दोहराई गई|
सरकार का कहना हैं कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण भारत पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता हैं| ऐसे में विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने और आयात खर्च कम करने के लिए जनता का सहयोग ज़रूरी हैं|
पीएम मोदी ने क्या कहा था?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि देश को इस समय आर्थिक रूप से मजबूत बनाए रखने के लिए हर नागरिक को छोटी-छोटी बचत पर ध्यन देना होगा| उन्होंने लोगों से अपील की कि जहाँ संभव हो वहां मेट्रो, बस और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें, अनावश्यक पेट्रोल-डीजल खर्च कम करें और वर्क फॉर्म होम जैसी व्यवस्था पर भी विचार करें|
पीएम मोदी ने खास तौर पर सोने की खरीदारी को लेकर भी बड़ी बात कही| उन्होंने कहा कि भारत बड़ी मात्र में सोना विदेशों से आयात करता हैं, जिससे विदेशी मुद्रा का भारी खर्च होता हैं| ऐसे में अगर लोग एक साल तक नई सोने की खरीदारी टाल दें तो देश की अर्थव्यस्था को राहत मिल सकती हैं|
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि विदेशी यात्राओं, डेस्टिनेशन वेडिंग और गैर-ज़रूरी खर्चो को कुछ समय के लिए कम करना देशहित में हो सकता हैं| उनका कहना था कि छोटे-छोटे कदम मिलकर बड़े आर्थिक संकट को टाल सकते हैं|
पेट्रोलियम मंत्रालय ने क्या कहा?
पीएम मोदी की अपील के अगले दिन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि फ़िलहाल देश में ईंधन संकट जैसी कोई स्थिति नहीं हैं, लेकिन लोगों को तेल बचाने की दिशा में गंभीरता से काम करना चाहिए| मंत्रालय ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की बचत करना इस समय राष्ट्रीय जिम्मेदारी हैं|
मंत्रालय के अनुसार, भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में विदेशों से आयात करता हैं| यदि अंतर्राष्ट्रीय हालात और खराब होते है तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं| ऐसे में ईंधन की बचत देश के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच साबित हो सकती हैं|
आखिर सरकार को तेल और सोने की चिंता क्यों?
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल हैं| देश अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से खरीदता हैं| जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता हैं तो भारत का आयात बिल बढ़ जाता हैं| इसका सीधा असर विदेशी मुद्रा भंडार और रूपये की कीमत पर पड़ता हैं|
इसी तरह भारत में सोने की मांग भी बहुत ज्यादा हैं| शादी-विवाह और त्योहारों में बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जाता हैं| लेकिन इसका अधिकांश हिस्सा विदेशों से आयात होता हैं| इससे डॉलर में भुगतान करना पड़ता हैं और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता हैं|

विशेषज्ञों का मानना हैं कि यदि तेल और सोने के आयात में कमी आती हैं तो देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाए रखने में मदद मिल सकती हैं| इससे रूपये की स्थिति भी बेहतर रह सकती हैं|
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वर्क फॉर्म होम और पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर जोर:-
प्रधानमंत्री मोदी ने कोविड काल की तरह फिर से वर्क फ्रॉम होम मॉडल पर विचार करने की बात कही| उनका कहना था कि इससे लाखों लीटर ईंधन की बचत हो सकती हैं| साथ ही उन्होंने लोगों से मेट्रो और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ाने की भी अपील की|
सरकार का मानना हैं कि यदि लोग निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करेंगे तो पेट्रोल और डीजल की खपत में बड़ी कमी लाई जा सकती हैं| इससे देश का आयात खर्च भी घटेगा|
विपक्ष ने क्या प्रतिक्रिया दी?
पीएम मोदी की अपील पर विपक्षी दलों ने सवाल भी उठाए हैं| कुछ नेताओं ने इसे आर्थिक दबाव की निशानी बताया| विपक्ष का कहना हैं कि जनता पर बोझ डालने के बजाय सरकार को मजबूत आर्थिक नीति बनानी चाहिए|
हालांकि सरकार का कहना हैं कि यह कोई प्रतिबंध नहीं बल्कि देशहित में की गई अपील हैं| सरकार ने साफ़ किया हैं कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं हैं और देश में किसी तरह का ईंधन संकट नहीं हैं|
गोल्ड मोनेटाइजेशन सकीं फिर चर्चा में:-
पीएम मोदी की अपील के बाद गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम भी चर्चा में आ गई हैं| यह योजना लोगों के घरों में रखे सोने को बैंकिंग सिस्टम में लाने के लिए शुरू की गई थी ताकि सोने के आयात को कम किया जा सके| हालांकि यह योजना पहले ज्यादा सफल नहीं रही थी, लेकिन अब इसे फिर से प्रभावी बनाने की मांग उठ रही हैं|
विशेषज्ञों का कहना हैं कि यदि लोग नया सोना खरीदने के बजाय पुराने सोने का उपयोग करें या उसे बैंकिंग सिस्टम में जमा करें तो इससे देश को आर्थिक लाभ मिल सकता हैं|
क्या आम लोगों पर पड़ेगा असर?
आर्थिक जानकारों के अनुसार, फ़िलहाल यह केवल सरकार की अपील हैं और कोई क़ानूनी रोक नहीं लगाई गई हैं| लोग अपनी जरूरत के अनुसार सोना खरीद सकते हैं और यात्रा भी कर सकते हैं| लेकिन सरकार चाहती हैं कि लोग कुछ समय तक गैर-ज़रूरी खर्चो में कटौती करें ताकि वैश्विक संकट का असर कम हो सके|
यदि आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती हैं तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता हैं| इसलिए सरकार अभी से बचत और सतर्कता पर जोर दे रही हैं|
निष्कर्ष:-
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तेल बचाने और सोना कम खरीदने की अपील ने देशभर में नई चर्चा शुरू कर दी हैं| सरकार का कहना हैं कि यह कदम देश की अर्थव्यस्था और विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए ज़रूरी हैं| वहीं पेट्रोलियम मंत्रालय ने भी साफ़ कर दिया हैं कि फ़िलहाल कोई संकट नहीं हैं, लेकिन ईंधन बचाना समत की मांग हैं|
अब देखने वाली बात होगी कि जनता इस अपील को कितना गंभीरता से लेती हैं और आने वाले दिनों में सरकार आर्थिक मोर्चे पर क्या नए कदम उठाती हैं|
“मेरे अनुसार देश की आर्थिक स्थिति मजबूत रखने के लिए तेल की बचत और गैरजरूरी खर्च कम करना एक अच्छी सोच हो सकती हैं| अगर हर नागरिक छोटी-छोटी बचत पर ध्यान दे, तो इसका फायदा पुरे देश को मिल सकता हैं|”
