CM Vijay ने LTTE चीफ प्रभाकरन को दी श्रद्धांजली,
तमिलनाडू के मुख्यमंत्री और टिवीके प्रमुख C. Joseph Vijay द्वारा पूर्व लिट्टे प्रमुख Velupillai Prabhakaran को श्रद्धांजली देने के बाद देश की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया हैं| भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर सीधा हमला बोला हैं और कहा हैं कि कांग्रेस सत्ता की राजनीति के लिए सब कुछ भूल चुकी हैं|
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यह पूरा मामला “मुल्लिवैक्क्ल स्मरण दिवस” से जुड़ा हैं, जिसे श्रीलंकाई तमिल समुदाय हर साल मनाता हैं| इसी मौके पर मुख्यमंत्री विजय ने तमिलों के अधिकारों और संघर्ष को याद करते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की| इसके बाद भाजपा ने कांग्रेस और राहुल गाँधी को घेरना शुरू कर दिया|
क्या हैं पूरा मामला?
18 मई को तमिलनाडू के मुख्यमंत्री विजय ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर एक पोस्ट किया| उन्होंने लिखा कि मुल्लिवैक्क्ल की यादें हमेशा दिल में रहेंगी और समुद्र पार रहने वाले तमिलों के अधिकारों के लिए उनकी सरकार हमेशा खड़ी रहेगी|
इस पोस्ट को कई लोगों ने पूर्व लिट्टे प्रमुख प्रभाकरन को श्रद्धांजली के रूप में देखा| इसके बाद भाजपा नेताओं ने सवाल उठाया कि आखिर कांग्रेस इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं|
भाजपा ने क्या कहा?
भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कांग्रेस और राहुल गाँधी पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस संगठन पर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की हत्या का आरोप हैं, उसी संगठन के प्रमुख को श्रद्धांजली दी जा रही हैं और कांग्रेस चुप बैठी हैं|
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भाजपा नेताओं का कहना हैं कि कांग्रेस सिर्फ सत्ता में हिस्सेदारी के लिए ऐसे मुद्दों पे चुप्पी साध रही हैं| पार्टी ने यह भी कहा की राजीव गाँधी की हत्या भारत के इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में से एक थी और ऐसे में प्रभाकरन को लेकर नरम रुख अपनाना गलत संदेश देता हैं|
कांग्रेस की चुप्पी पर उठे सवाल
अब तक कांग्रेस की ओर से इस विवाद पर कोई बड़ा आधिकारिक बयान सामने नहीं आया हैं| यही वजह हैं कि भाजपा लगातार राहुल गाँधी पर हमलावर हैं|
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना हैं कि तमिलनाडू की राजनीति में श्रीलंकाई तमिलों का मुद्दा काफी संवेदनशील माना जाता हैं| कई क्षेत्रीय दल तमिलों के अधिकारों की बात करते रहे हैं| लेकिन लिट्टे और प्रभाकरन का नाम सामने आते ही मामला राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा विवाद बन जाता हैं|
टीवीके की सफाई
विजय की पार्टी टीवीके की ओर से कहा गया कि मुख्यमंत्री का बयान किसी आतंकी संगठन के समर्थन में नहीं था| पार्टी के नेताओं ने कहा की यह पोस्ट श्रीलंका में मारे गए तमिल नागरिकों और उनके दर्द को याद करने के लिए था|
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टीवीके ने दावा किया कि विजय ने अपने पोस्ट में सीधे तौर पर प्रभाकरन का नाम नहीं लिया था| पार्टी के मुताबिक, तमिल समुदाय के लोगों के मानवाधिकार और उनके संघर्ष को याद करना अलग बात हैं और आतंकवाद का समर्थन करना अलग|
क्यों संवेदनशील हैं यह मुद्दा?
लिट्टे यानी लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम एक उग्रवादी संगठन था, जो श्रीलंका में अलग तमिल राष्ट्र की मांग कर रहा था| भारत में इस संगठन पर प्रतिबंध लगा हुआ हैं|
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की 1991 में हुई हत्या में लिट्टे का नाम सामने आया था| जांच एजेंसियों ने प्रभाकरन को मुख्य आरोपियों में शामिल किया था| यही कारण हैं कि भारत की राष्ट्रीय राजनीति में प्रभाकरन का नाम आते ही विवाद शुरू हो जाता हैं|
तमिलनाडू की राजनीति में क्यों अहम हैं विजय?
फिल्म अभिनेता से नेता बने विजय ने हाल के विधानसभा चुनावों में बड़ी जीत दर्ज की और पहली बार मुख्यमंत्री बने| उनकी पार्टी तमिल युवाओं और नए मतदाताओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हुई हैं|
राजनीतिक जानकारों का मानना हैं कि विजय तमिल पहचान और क्षेत्रीय मुद्दों को मजबूती से उठाकर अपनी राजनीति को अलग दिशा देना चाहते हैं| श्रीलंकाई तमिलों का मुद्दा भी इस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा हैं|
राहुल गाँधी और विजय के रिश्तों पर चर्चा
इस विवाद के बीच भाजपा ने राहुल गाँधी और विजय के राजनीतिक रिश्तों पर भी सवाल उठाए हैं| भाजपा नेताओं का कहना हैं कि कांग्रेस ने तमिलनाडू में राजनीतिक लाभ के लिए विजय का समर्थन किया और अब इसी कारण चुप्पी साधे हुए हैं|
हालांकि कांग्रेस और टीवीके दोनों दलों की ओर से भाजपा के आरोपों पर अभी विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई हैं|
सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
यह मुद्दा सोशल मीडिया पर भी तेजी से ट्रेंड करने लगा| कुछ लोग विजय के बयां को तमिलों के मानवाधिकारों के समर्थन के रूप में देख रहे हैं, जबकि क्यों लोगों ने इसे गलत बताया|
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कई यूजर्स ने कहा कि तमिल नागरिकों के दर्द को याद करना ज़रूरी हैं, लेकिन किसी प्रतिबंधित संगठन के नेता को महिमामंडित करना ठीक नहीं माना जा सकता| वहीं विजय समर्थकों का कहना हैं कि मुख्यमंत्री ने सिर्फ तमिल समुदाय के संघर्ष की बात की हैं|
आने वाले समय में बढ़ सकती हैं राजनीति
विशेषज्ञों का मानना हैं कि यह विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता हैं| भाजपा इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और राजीव गाँधी हत्या केस से जोड़कर लगातार कांग्रेस को घेर सकती हैं|
दूसरी ओर, विजय और उनकी पार्टी तमिल पहचान और क्षेत्रीय भावनाओं को लेकर अपनी राजनीति मजबूत करने की कोशिश करेंगे| ऐसे में यह मामला सिर्फ तमिलनाडू तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बना रहेगा|
फ़िलहाल सबसे बड़ा सवाल यही हैं कि क्या कांग्रेस इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखेगी या फिर राजनीतिक समीकरणों के चलते चुप्पी बनाए रखेगी|
