CBSE 12वीं रिजल्ट: ग्रेस मार्क्स और मोडरेशन का पूरा गणित, समझें कैसे तय होते हैं आपके नंबर?

CBSE 12वीं रिजल्ट:

नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 12वीं की परीक्षा देने वाले लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के मन में इस समय केवल एक ही सवाल हैं- ‘रिजल्ट कब आएगा और नंबर कैसे मिलेंगे?’ अक्सर छात्र परीक्षा के बाद अपने अंकों का अनुमान लगाते हैं, लेकिन जब रिजल्ट आता हैं, तो वह उनके अनुमान से अलग होता हैं| इसके पीछे सीबीएसई की दो महत्वपूर्ण नीतियाँ काम करती हैं| मोडरेशन (Moderation) और ग्रेस मार्क्स (Grace Marks)|

PM मोदी की बड़ी अपील के बाद पेट्रोलियम मंत्रालय का बयान, बोले-“तेल बचाईए, एक साल तक सोना खरीदने से बचिए”

आज के इस विशेष लेख में हम इन दोनों नियमों को बारीकी से समझेंगे ताकि आप जान सकें कि बोर्ड आपकी मेहनत का मुल्यांकन किस आधार पर करता हैं|

1. मॉडरेशन पालिसी: क्यों हैं यह ज़रूरी?

सीबीएसई एक राष्ट्रीय स्तर का बोर्ड हैं जो पुरे देश और विदेश में परीक्षाएं आयोजित करता हैं| इतनी बड़ी संख्या में छात्रों के लिए एक ही विषय के कई सेट्स (Sets) तैयार किए जाते हैं|

समानता का सिद्धांत:-

कभी-कभी ऐसा होता हैं कि सेट-A बहुत आसान होता हैं, जबकि सेट-B के सवाल काफी घुमावदार या कठिन होते हैं| ऐसे में सेट-B वाले छात्रों के साथ नाइंसाफी न हो, इसके लिए ‘मॉडरेशन’ का सहारा लिया जाता हैं| बोर्ड विशेषज्ञों की एक टीम नियुक्त करता हैं जो सभी सेट्स की कठिनाई के स्तर की जांच करती हैं| यदि कोई सेट कठिन पाया जाता हैं, तो उस सेट के छात्रों के अंकों को आनुपातिक रूप से (Proportionally) बढ़ाया जाता हैं|

विभिन्न क्षेत्रों में संतुलन:-

भारत के अलग-अलग क्षेत्रों (जैसे दिल्ली, पंचकुला, चेन्नई आदि) में कॉपियो का मुल्यांकन अलग-अलग शिक्षकों द्वारा किया जाता हैं| मुल्यांकन के तरीके में एकरूपता लाने के लिए भी मॉडरेशन का उपयोग होता हैं ताकि किसी एक क्षेत्र के छात्र दुसरे क्षेत्र से पीछे ने रह जाएँ|

तमिलनाडू में सीएम विजय का पहला बड़ा एक्शन! 717 शराब की दुकानें बंद, गरीब परिवारों के लिए भी किए बड़े एलान

2. ग्रेस मार्क्स: फेल होने से बचाने वाला ‘बैकअप’

अक्सर छात्र एक या दो नंबर से पास होने से रह जाते हैं| ऐसे मे बोर्ड ‘ग्रेस मार्क्स’ की नीति अपनाता हैं|

  • किसे मिलते हैं ग्रेस मार्क्स?:- यह उन छात्रों को दिए जाते हैं जो पासिंग मार्क्स (33%) के बहुत करीब होते हैं| उदहारण के लिए, यदि किसी छात्र को 70 में से 23 नंबर चाहिए और उसके 21 नंबर आ रहे हैं, तो बोर्ड उसे 2 नंबर ग्रेस के तौर पर देकर पास कर सकता हैं|
  • कितने विषयों में मिलते हैं?:- आमतौर पर ग्रेस मार्क्स केवल एक या दो विषयों में ही दिए जाते हैं| यदि कोई छात्र कई विषयों में ही दिए जाते हैं| यदि कोई छात्र कई विषयों में फेल हो रहा हैं, तो उसे इसका लाभ नहीं मिलता|
  • गोपनीयता:- बोर्ड कभी भी यह सार्वजनिक नहीं करता कि किस छात्र को कितने ग्रेस मार्क्स दिए गए हैं| यही सीधे फाइनल रिजल्ट में जोड़ दिए जाते हैं|

3. गलत सवालों पर मिलते हैं ‘बोनस अंक’

परीक्षा के दबाव में कभी-कभी प्रश्न पत्र में टाईपिंग की गलती हो जाती हैं या कोई सवाल सिलेबस से बाहर (Out of Syllabus) पूछ लिया जाता हैं|

  • नियम:- यदि बोर्ड को लगता हैं कि सवाल में तकनीकी गलती थी, तो उस सवाल को हल करने की कोशिश करने वाले सभी छात्रों को पुरे नंबर दिए जाते हैं|
  • सुझाव:- इसीलिए शिक्षकों द्वारा हमेशा सलाह दी जाती हैं कि अगर कोई सवाल गलत भी लग रहा हो, तो उसे छोड़े नहीं, बल्कि अटेम्प्ट (Attempt) जरुर करें|

4. थ्योरी और प्रैक्टिकल का पेच

12वीं कक्षा में पास होने के नियम 10वीं से अलग हैं|

  • अलग-अलग पास होना अनिवार्य:- 12वीं में छात्र को थ्योरी पेपर (70 या 80 नंबर) और प्रैक्टिकल/इंटरनल असेसमेंट (20 या 30 नंबर) दोनों में अलग-अलग 33% अंक लाने होते हैं|
  • कुल प्रतिशत:- यदि आप थ्योरी में पास हैं लेकिन प्रैक्टिकल में फेल, तो आप उस विषय में फेल माने जाएंगे|

5. रिलेटिव ग्रेडिंग: आपकी असली पोजीशन

अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव का निधन, सियासी गलियारों में शोक की लहर

सीबीएसई केवल अंकों पर ही नहीं, बल्कि ‘ग्रेड्स’ पर भी ध्यान देता हैं| बोर्ड पास होने वाले छात्रों को 8 श्रेणियों में बांटता हैं|

  1. A-1: शीर्ष 1/8 छात्र|
  2. A-2: अगले 1/8 छात्र|
  3. B-1, B-2, C-1, C-2, D-1, D-2: इसी क्रम में अन्य छात्र|

यह ग्रेडिंग सिस्टम th दर्शाता हैं कि आप उस वर्ष के कुल छात्रों के मुकाबले कहाँ खड़े हैं|

6. रिजल्ट के बाद के विकल्प: अगर आप संतुष्ट नहीं हैं

रिजल्ट आने के बाद भी छात्रों के पास कई विकल्प होते हैं|

  • वेरिफिकेशन (Verification):- अगर आपको लगता हैं कि आपके नंबर कम हैं, तो आप अंकों की दोबारा गिनती के लिए आवेदन कर सकते हैं|
  • फोटोकॉपी:- आप अपनी चेक की हुई आंसर-शीट की फोटोकॉपी मंगवा सकते हैं|
  • पुनर्मुल्यांकं (Re-evaluation):- यदि आपको लगता हैं कि कोई सवाल सही होने के बावजूद गलत काटा गया हैं, तो आप प्रति प्रश्न के हिसाब से उसे दोबारा चेक करवा सकते हैं|

7. डिजिटल माध्यमों से रिजल्ट कैसे देखें?

योगी कैबिनेट 2.0 का महा-विस्तार: 2027 की तैयारी या विपक्ष के ‘PDA’ की काट? जानें हर नए मंत्री की कुंडली और BJP का मास्टरप्लान!

आजकल बोर्ड रिजल्ट चेक करने के लिए कई आधुनिक सुविधाएँ देता हैं|

  • DigiLocker:- सीबीएसई अब डिजिटल माइग्रेशन और मार्कशीट सीधे डीजीलाकर पर भेजता हैं, जो क़ानूनी रूप से हर जगह मान्य हैं|
  • UMANG App:- सरकारी उमंग एप के जरिए भी रिजल्ट देखा जा सकता हैं|
  • IVRS:- इंटरनेट न होने पर छात्र बोर्ड द्वारा जारी टोल-फ्री नंबर पर कॉल करके भी अपना रिजल्ट सुन सकते हैं|

निष्कर्ष:-

सीबीएसई की मॉडरेशन और ग्रेस मार्क्स पालिसी का मुख्य उद्देश्य छात्रों को नुकसान से बचाना हैं| यह सुनिश्चित किया जाता हैं कि किसी भी छात्र का भविष्य केवल एक कठिन सवाल या शिक्षक की मामूली चुक की वजह से खराब न हो| छात्रों को सलाह दी जाती हैं कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर ही भरोसा करें|

डिस्क्लेमर:- यह जानकारी शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए हैं| बोर्ड के नियमों में समय-समय पर बदलाव हो सकते हैं, इसलिए नवीनतम अपडेट के लिए सीबीएसई की आधिकारिक गाइडलाईन्स जरुर देखें|

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Exit mobile version