20 दिन में बड़ा बदलाव! तमिलनाडू सचिवालय में 1 जून से बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य

तमिलनाडू सचिवालय में बायोमेट्रिक हाजिरी|

20 दिन में बड़ा बदलाव!

तमिलनाडू की राजनीति और प्रशासन में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला हैं| मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सचिवालय में कामकाज को अधिक पारदर्शी और अनुशासित बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया हैं| 1 जून से तमिलनाडू सचिवालय के मानव संसाधन प्रबंधन विभाग (Human Resources Management Department) में बायोमेट्रिक और फेस आईडी आधारित उपस्थिति प्रणाली लागू की जा रही हैं| यह फैसला मुख्यमंत्री के पद संभालने के कुछ ही दिनों बाद लिया गया हैं, इसलिए इसे नई सरकार की तेज प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा हैं|

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सचिवालय में अब डिजिटल हाजिरी

सरकार द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार विभाग के सभी अधिकारीयों और कर्मचारियों को 1 जून से अपनी उपस्थिति बायोमेट्रिक मशीन या फेस आईडी सिस्टम के जरिए दर्ज करनी होगी| इसके साथ-साथ फ़िलहाल मैनुअल उपस्थिति रजिस्टर भी जारी रहेगा| अधिकारीयों को सुबह 10 बजे से पहले कार्यालय पहुँचकर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी|

सरकार का मानना हैं कि नई प्रणाली से कर्मचारियों की समयपालन की आदत मजबूत होगी और उपस्थिति रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ेगी| लंबे समय से सचिवालय में समय पर उपस्थिति को लेकर शिकायतें सामने आती रही थीं, जिसके बाद यह कदम उठाया गया हैं|

विजय सरकार का बड़ा प्रशासनिक संदेश

मुख्यमंत्री विजय के सत्ता संभालने के बाद यह प्रशासनिक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा हैं| नई सरकार शुरुआत से ही सरकारी कार्यालयों में जवाबदेही और कार्यकुशलता बढ़ाने की बात करती रही हैं| ऐसे में सचिवालय में बायोमेट्रिक हाजिरी लागु करना सरकार के उसी एजेंडे का हिस्सा माना जा रहा हैं|

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राजनीतिक विश्लेषकों का कहना हिन् कि सरकार जनता के बीच यह संदेश देना चाहती हैं कि सरकारी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में सुधार और अनुशासन को प्राथमिकता दी जाएगी| यही कारण हैं कि मुख्यमंत्री के कार्यभार संभालने के कुछ ही समय बाद इस तरह के फैसले सामने आ रहे हैं|

पहले ट्रायल, अब पूरी तरह लागु

दरअसल यह प्रणाली बिल्कुल नई नहीं हैं| पिछले वर्ष सचिवालय के कुछ हिस्सों में फेस आईडी और बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली का परीक्षण किया गया था| उस समय कर्मचारियों की कुछ आपत्तियों और तकनीकी समस्याओं के कारण इसे पूरी तरह लागू नहीं किया गया था|

अब विभाग का कहना हैं कि परीक्षण अवधि के दौरान सामने आई समस्याओं का समाधान कर लिया गया हैं और इसलिए 1 जून से इसे औपचारिक रूप से लागू किया जा रहा हैं|

कर्मचारियों के लिए नए निर्देश

नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को केवल बोइमेट्रिक उपस्थिति ही नहीं बल्कि कुछ अन्य नियमो का भी पालन करना होगा| विभागीय आदेश में कहा गया हैं कि सभी अधिकारी और कर्मचारी ड्यूटी के दौरान अपना अधिकारिक पहचान पत्र पहनकर रखें|

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इसके अलावा कर्मचारियों को समय पर कार्यालय पहुंचना अनिवार्य होगा| अधिकारीयों का मानना हैं कि इससे कार्यालयों में कार्य संस्कृति बेहतर होगी और जनता से जुड़े मामलों का निपटारा तेजी से हो सकेगा|

दुसरे विभागों में भी हो सकता हैं विस्तार

सरकारी सूत्रों के अनुसार फ़िलहाल यह व्यवस्था मानव संसाधन प्रबंधन विभाग में लागू की जा रही हैं| यदि इसका परिणाम सकारात्मक रहता हैं तो आने वाले महीनो में इसे सचिवालय के अन्य विभागों में भी लागु किया जा सकता हैं|

खाद्य एंव सहकारिता विभाग सहित कई अन्य विभाग पहले ही कर्मचारियों को समय पर कार्यालय पहुँचने के निर्देश दे चुके हैं| ऐसे में माना जा रहा हैं कि भविष्य में पुरे सचिवालय में डिजिटल उपस्थिति प्रणाली लागु हो सकती हैं|

क्या होगा फायदा?

विशेषज्ञों का कहना हैं कि बायोमेट्रिक और फेस आईडी आधारित उपस्थिति प्रणाली के कई फायदे हैं|

  • फर्जी उपस्थिति की संभावना कम होगी|
  • कर्मचारियों की समयपालन क्षमता बढ़ेगी|
  • प्रशासनिक निगरानी आसान होगी|
  • कार्यालयों की कार्यकुशलता में सुधार आएगा|
  • जनता से जुड़े काम तेजी से पुरे हो सकेंगे|

डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से उपस्थिति रिकॉर्ड अधिक सटीक और पारदर्शी बनेगा| यही कारण हैं कि देश के कई सरकारी और निजी संस्थानों में पहले से ऐसी व्यवस्था लागु हैं|

कर्मचारियों की प्रतिक्रिया

कुछ कर्मचारियों ने नई व्यवस्था का स्वागत किया हैं और इसे आधुनिक प्रशासन की दिशा में अच्छा कदम बताया हैं| वहीं कुछ कर्मचारियों का मानना हैं कि तकनीकी दिक्कतों और नेटवर्क समस्याओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए ताकि किसी कर्मचारी को अनावश्यक परेशानी न हो|

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हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया हैं कि शुरूआती चरण में मैनुअल उपस्थिति भी जारी रहेगी, जिससे किसी प्रकार की तकनीकी समस्या होने पर काम प्रभावित न हो|

जनता के बीच चर्चा तेज

मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व में लिए गए इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा हो रही हैं| कई लोग इसे सरकारी व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रहे हैं| वहीं कुछ लोग इसे कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ाने वाला निर्णय मान रहे हैं|

निष्कर्ष:-

तमिलनाडू सचिवालय में 1 जून से बायोमेट्रिक और फेस आईडी आधारित उपस्थिति प्रणाली लागू होना राज्य प्रशासन के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा हैं| मुख्यमंत्री विजय के कार्यभार संभालने के कुछ ही समय बाद लिया गया यह फैसला सरकार की प्रशासनिक सख्ती और डिजिटल सुधारों की नीति को दर्शाता हैं| यदि यह प्रयोग सफल रहता हैं तो आने वाले समय में तमिलनाडू के अन्य सरकारी विभागों में भी ऐसी व्यवस्था लागु की जा सकती हैं| फ़िलहाल राज्य सरकार का उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता, अनुशासन और कार्यकुशलता बढ़ाना हैं, जिससे आम जनता को बेहतर सेवाएं मिल सकें|

 

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