राम नवमी 2026: यूपी में 2 दिन की छुट्टी, अयोध्या में रामलला का सूर्य तिलक

अयोध्या/लखनऊ/गाजीपुर: 26 मार्च, 2026
चैत्र नवरात्रि के पावन समापन और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव ‘राम नवमी’ के शुभ अवसर पर आज पूरा उत्तर प्रदेश भक्ति के रंग में सराबोर हैं| वर्ष 2026 की यह राम नवमी एतिहासिक मानी जा रही हैं, क्योंकि अयोध्या के भव्य मंदिर में रामलला के दर्शन के लिए रिकॉर्ड तोड़ श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी हैं| भक्तों के उत्साह और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को बड़ी सौगात देते हुए 26 और 27 मार्च दोनों दिन सरकारी छुट्टी का एलान किया हैं|
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय केवल उत्सव के लिए नहीं, बल्कि अयोध्या और अन्य धार्मिक स्थलों पर उमड़ने वाली लाखों की भीड़ के सुचारू प्रबंधन के लिए लिया गया हैं|
अयोध्या के ‘सूर्य तिलक’ का अद्भुत नजारा:-
आज दोपहर ठीक 12:00 बजे अयोध्या के राम मंदिर में एक बार फिर विज्ञान और आध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिला| भगवान रामलला के ललाट पर सूर्य की किरणों से ‘सूर्य तिलक’ किया गया| ऑप्टो-मैकेनिकल सिस्टम के जरिए सूर्य को रोशनी को दर्पण और लेंस की मदद से सीधे प्रभु के मस्तक पर केंद्रित किया गया| इस दिव्य दृश्य को देखने के लिए मंदिर परिसर में मौजूद हजारों भक्तों की आँखें नम हो गई और पूरा परिसर ‘जय श्री राम’ के उद्धोष से गूंज उठा|
प्रसार भरती द्वारा इस घटनाक्रम का दुनिया भर के 100 से अधिक देशों में सीधा प्रसारण किया गया, जिससे घर बैठे करोड़ो श्रद्धालुओं ने इस अलौकिक पल का आनंद लिया|
दो दिन की छुट्टी: आम जनता और कर्मचारियों को राहत:-
उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, 26 मार्च (गुरुवार) को राम नवमी का मुख्य अवकाश घोषित किया गया हैं|इसके बाद शनिवार और रविवार की छुट्टियाँ होने के कारण प्रदेश में लगातार चार दिनों का लंबा वीकेंड (Long Weekend) मिल गया हैं|
इस फैसले का सबसे बड़ा कारण अयोध्या की सुरक्षा व्यवस्था हैं| अनुमान हैं कि इस बार करीब 40 से 50 लाख श्रद्धालु अयोध्या पहुँच सकते हैं| दो दिन की छुट्टी होने से सरकारी कर्मचारी और आम जनता बिना किसी अफरातफरी के अपने परिवार के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हो सकेंगे|
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: चप्पे-चप्पे पर नजर:-
राम नवमी के उपलक्ष्य में गाजीपुर, वाराणसी और प्रयागराज जैसे संवेदनशील जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया हैं|
- ड्रोन से निगरानी:- अयोध्या के राम जन्मभूमि परिसर और सरयू घाट के आसपास 50 से अधिक हाई-टेक ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी जा रही हैं|
- एटीएस (ATS) की तैनाती:- सुरक्षा के लिहाज से यूपी एटीएस की कमांडो यूनिट को प्रमुख चौराहों पर तैनात किया गया हैं|
- ट्रैफिक डायवर्जन:- लखनऊ-अयोध्या हाईवे और वाराणसी-गाजीपुर मार्ग पर भारी वाहनों का प्रवेश वर्जित कर दिया गया हैं ताकि श्रद्धालुओं की बसों और निजी वाहनों को रास्ता मिल सके|
गाजीपुर और वाराणसी में उत्सव की धूम:-
पूर्वांचल के जिलों में भी राम नवमी का उल्लास चरम पर हैं| गाजीपुर के सुप्रसिद्ध रामलीला मैदानों और मंदिरों में विशेष अखंड रामायण का पाठ चल रहा हैं| स्थानीय प्रशासन ने गंगा घाटों पर स्नान के लिए आने वाले भक्तो की सुरक्षा हेतु जल पुलिस और गोताखोरों की टीम तैनात की हैं| वाराणसी के संकट मोचन मंदिर और तुलसी मानस मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं| चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन ‘माँ सिद्धिदात्री’ की पूजा के साथ-साथ कन्या पूजन का भव्य आयोजन घर-घर में किया जा रहा हैं|
डिजिटल दर्शन और नई तकनीक का उपयोग:-
इस साल राम नवमी पर तकनीक का भी भरपूर सहयोग लिया गया हैं| ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट ने एक विशेष एप लाँच किया हैं, जिसके माध्यम से भक्त वर्चुअल रियलिटी (VR) के जरिए मंदिर के भीतर का 360-डिग्री व्यू देख सकते हैं| इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित भीड़ नियंत्रण प्रणाली का उपयोग किया जा रहा हैं, जो प्रशासन को पहले ही संकेत दे देती हैं कि किस मार्ग पर दबाव बढ़ रहा हैं|
कन्या पूजन और चैत्र नवरात्रि का समापन:-
चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन, राम नवमी के पावन अवसर पर, अन्य पूजन का विशेष महत्व हैं| उत्तर प्रदेश के घर-घर में आज सुबह से ही ‘माँ सिद्धिदात्री’ की पूजा-अर्चना के बाद नौ वर्ष से कम उम्र की कन्याओं को आदरपूर्वक बुलाकर उनके पैर धोए गए, तिलक लगाया गया और उन्हें माँ दुर्गा का रूप मानकर भोजन (हलवा-पूरी, चना) कराया गया| भक्तों ने कन्याओं को उपहार और दक्षिणा देकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लिया| यह अनुष्ठान इस पावन पर्व की पवित्रता और नारी शक्ति के प्रति सम्मान का प्रतीक हैं|
उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा:-
राम नवमी पर योगी सरकार द्वारा दो दिनों का सार्वजनिक अवकाश घोषित करने के फैसले को राज्य में धार्मिक पर्यटन (Spiritual Tourism) को बढ़ावा देने के एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा हैं| लगातार चार दिनों की छुट्टी होने से दिल्ली, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज पहुँच रहे हैं| इससे न केवल होटलों और परिवहन व्यवसाय और गाईडों के लिए भी रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं, जो प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत हैं|
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राम लला का दिव्य ‘श्रृंगार’ और विशेष ‘भोग’:-
राम नवमी के दिन अयोध्या के भव्य मंदिर में भगवान रामलला का श्रृंगार अत्यंत अलौकिक और मनमोहक रहा| प्रभु को विशेष रूप से वाराणसी से मंगवाए गए पीले रेशनी वस्त्र पहनाए गए, जिन पर सोने और चांदी के तारों से कढ़ाई की गई थी| उनके आभूषणों में कीमती रत्न और हीरे जड़े थे| जन्मोत्सव के शुभ मुहूर्त पर भगवान को 56 प्रकार के व्यंजनों का महाभोग लगाया गया, जिसमें केसरिया पेड़ा, पंजीरी, खीर और पंचामृत मुख्य थे| इस भोग का एक बड़ा हिस्सा भक्तों के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया गया|
सरयू नदी में आस्था की दुबकी: ‘शाही स्नान’ जैसा नजारा:-
राम नवमी के उपलक्ष्य में अयोध्या की पवित्र सरयू नदी में ब्रह्म श्रद्धालुओं ने ‘शाही स्नान’ की तर्ज पर नदी में दुबकी लगाकर पुण्य कमाया| भक्तों का मानना हैं कि राम नवमी के दिन सरयू में स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती हैं| प्रशासन ने सरयू घाटों पर भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे, जिसमें जल पुलिस और गोताखोरों की टीमें लगातार गश्त कर रही थीं ताकि कोई अप्रिय घटना न हो|
‘क्लीन अयोध्या, ग्रीन अयोध्या’: स्वच्छता और सुविधाओं पर जोर:-
लाखों की भीड़ के बावजूद अयोध्या में स्वच्छता और सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा हैं| नगर निगम ने ‘क्लीन अयोध्या, ग्रीन अयोध्या’ अभियान के तहत 1000 से अधिक अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों को तैनात किया हैं| श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह पीने के पानी की व्यवस्था (Water Kiosks), अस्थायी शौचालय और मेडिकल कैंप लगाए गए हैं| अयोध्या के सभी प्रमुख मार्गों पर विशेष फूलों और एलइडी लाइट्स से सजावट की गई हैं, जो इस उत्सव की भव्यता को और बढ़ा रही हैं|
निष्कर्ष:-
राम नवमी 2026 उत्तर प्रदेश के इतिहास में आस्था, उत्साह और सरकारी संवेदनशील के एक सुनहरे अध्याय के रूप में याद रखी जाएगी| यह न केवल भगवान राम के जन्मोत्सव का प्रतीक हैं, बल्कि यह बदलते हुए अयोध्या और पूर्वांचल की प्रगति का भी प्रमाण हैं, जहाँ परंपरा और आधुनिकता का सुंदर समन्वय देखने को मिल रहा हैं|