मिडिल ईस्ट में महासंग्राम: ईरान में सत्ता परिवर्तन और इजरायल के साथ भीषण युद्ध का संकट

मिडिल ईस्ट में महासंग्राम:

तेहरान/यरूशलेम: मार्च 2026 की इन तारीखों ने पूरी दुनिया को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया हैं, जहाँ से तीसरे विश्व युद्ध की आहट सुनाई देने लगी हैं| ईरान, जो पिछले कई दशकों से मिडिल ईस्ट की राजनीति का केंद्र रहा हैं, आज अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा हैं| एक तरफ देश के भीतर ‘सत्ता परिवर्तन’ की हलचल हैं, तो दूसरी तरफ इसरायल के साथ सीधे सैन्य टकराव ने पूरी दुनिया की सांसें थाम दी हैं|

1. ईरान में नए युग की शुरुआत: मोजतबा खामेनेई का उदय 

ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद, ईसन के पावर स्ट्रक्चर में एक बड़ा वैक्यूम पैदा हो गया था| आज आधिकारिक तौर पर उनके बेटे, मोजतबा खामेनेई, को ईरान का न्य ‘सुप्रीम लीडर’ घोषित कर दिया गया हैं|

सत्ता का हस्तांतरण:- यह ईरान के इतिहास में एक बड़ा मोड़ हैं क्योंकि दशकों बाद नेतृत्व एक हाथ से दुसरे हाथ में गया हैं| मोजतबा खामेनेई को ईरान की ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड्स’ (IRGC) का कट्टर समर्थक माना जाता हैं|

भीतर का विरोध:- तेहरान की सड़कों पर सन्नाटा हैं, लेकिन ख़ुफ़िया रिपोर्टो के अनुसार, देश के भीतर एक बड़ा तबका इस ‘वंशवादी’ बदलाव का विरोध कर रहा हैं| विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए IRGC ने प्रमुख शहरों में मार्शल लॉ जैसी स्थिति पैदा कर दी हैं|

2. इसरायल-ईरान युद्ध: 2026 का सबसे बड़ा संकट 

ईरान में सत्ता परिवर्तन के बीच ही इसरायल और ईरान के बीच छद्म युद्ध (Proxy War) अब सीधे युद्ध में बदल चूका हैं| आज सुबह तेहरान और एस्फहान के परमाणु केन्द्रों के पास भारी धमाकों की आवाज सुनी गई|

इसरायल की एयरस्ट्राइक:- इसरायली प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कर दिया हैं कि वे ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने का ‘अंतिम मौका’ भी नहीं देंगे| लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले करने के बाद अब इसरायल वायुसेना ने सीधे ईरानी सरजमीं को निशाना बनाया हैं|

ईरान की जवाबी कार्यवाई:- ईरान ने भी ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 3’ के तहत सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाईलें इसरायल की ओर दागी हैं| यरूशलेम और तेल अवीव में आयरन डोम (Iron Dome) सिस्टम लगातार सक्रिय हैं, लेकिन कुछ मिसाईलों के गिरने से भारी नुकसान की खबरें हैं|

3. लेबनान और सीरिया: युद्ध के नए मोर्चे 

युद्ध केवल ईरान और इसरायल तक सीमित नहीं रहा हैं| लेबनान की राजधानी बेरुत आज मलबे के ढेर में तब्दील होती दिख रही हैं| इसरायल ने लेबनान में जमीनी सेना उतार दी हैं ताकि हिजबुल्लाह के खतरों को हमेशा के लिए खत्म किया जा सके|

सीरिया में भी ईरानी ठिकानों पर हमले तेज हो गए हैं| रूस और अमेरिका की सेनाएं भी इस क्षेत्र में हाई अलर्ट पर हैं, जिससे यह डर पैदा हो गया हैं कि कहीं दो महाशक्तियां आमने-सामने न आ जाएँ|

4. कच्चे तेल की कीमतों में आग और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर 

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इस युद्ध का सबसे बुरा असर ईधन की कीमतों पर पड़ा हैं:

100 डॉलर के पार:- ब्रेंट क्रूड आयल की कीमतें $110 प्रति बैरल को पार कर गई हैं|

सप्लाई चेन ठप:- होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जहाँ से दुनिया का 20% तेल गुजरता हैं, वहां ईरान ने माईन्स बिछाने की धमकी दी हैं| अगर यह रास्ता बंद हुआ, तो भारत समेत पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतें दोगुनी हो सकती हैं|

शेयर बाजार में हाहाकार:- भारत के सेंसेक्स और निफ्टी समेत वैश्विक बाजारों में निवेशकों के अरबों डॉलर डूब चुके हैं| सुरक्षति निवेश के तौर पर सोने (Gold) की कीमतें अपने आल-टाइम हाई पर पहुँच गई हैं|

5. भारत का रुख: कूटनीति बनाम संकट 

भारत के लिए यह स्थिति बहुत नाजुक हैं| विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने आज संसद में एक महत्वपूर्ण बयान दिया:

“हम मिडिल ईस्ट की स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं| भारत हमेशा से संवाद और कूटनीति का पक्षधर रहा हैं| युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं हैं| हमारी प्राथमिकता वहां फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा हैं|”

भारत के ईरान और इसरायल, दोनों के साथ मजबूत संबंध हैं| ऐसे में भारत एक मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा हैं, लेकिन बढ़ते तनाव ने इन कोशिशों को मुश्किल बना दिया हैं|

6. क्या यह तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत हैं?

रक्षा विशेषज्ञों का मानना हैं कि यदि ईरान ने इसरायल के तेल क्षेत्रों या रिहायशी इलाकों पर बड़ा हमला किया, तो अमेरिका सीधे तौर पर युद्ध में कूद सकता हैं| दूसरी ओर, चीन और रूस ईरान के साथ खड़े नजर आ रहे हैं| यह ‘ब्लॉक पॉलिटिक्स’ दुनिया को विनाश की ओर ले जा सकती हैं|

7. ईरान की ‘प्रॉक्सी आर्मी’ और क्षेत्रीय प्रतिरोध का जाल 

ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ (Axis of Resistance) को एकजुट रखने की हैं| लेबनान में हिजबुल्लाह, यमन में हुथी विद्रोहियों और इराक के शिया मिलिशिया ने एक साथ इसरायल पर हमले तेज कर दिए हैं|

लाल सागर (Red Sea) संकट:- हुथी विद्रोहियों ने लाल सागर में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाकर वैश्विक व्यापार की कमर तोड़ दी हैं| इससे भारत आने वाला कच्चा माल और इलेक्ट्रानिक सामान महंगा होने की पूरी आशंका हैं|

साइबर वॉर (Cyber Warfare):- यह युद्ध केवल जमीन और आसमान तक सीमित नहीं हैं| ईरान ने इसरायल के पावर ग्रिड और जल आपूर्ति प्रणालियों पर बड़े साइबर हमलों की कोशिश की हैं, वहीँ इसरायल के ‘यूनिट 8200’ ने ईरान के तेल ठिकानों के सॉफ्टवेयर सिस्टम को ठप करने का दावा किया हैं|

8. मानवीय संकट और शरणार्थियों का पलायन 

मिडल ईस्ट में बढ़ते इस तनाव ने एक भयानक मानवीय त्रासदी पैदा कर दी हैं| युद्ध की आग अब रिहायशी इलाकों तक पहुँच चुकी हैं|

बड़े पैमाने पर पलायन:- लेबनान और सीरिया ले सीमावर्ती इलाकों से लाखों लोग तुर्किये और यूरोप की तरफ भाग रहे हैं| यह 2015 के शरणार्थी संकट से भी बड़ा रूप ले सकता हैं|

खाद्य सुरक्षा:- युद्ध की वजह से पुरे क्षेत्र में अनाज और दवाओं की भारी किल्लत हो गई हैं| संयुक्त राष्ट्र (UN) ने चेतावनी दी हैं कि यदि युद्ध तुरंत नहीं रुका, तो यह 21वीं सदी का सबसे बड़ा मानव-निर्मित अकाल बन सकता हैं|

9. विश्व शक्तियों का दो-टुक स्टैंड: दो ध्रुवों में बंटी दुनिया 

वर्तमान स्थिति को देखते हुए दुनिया स्पष्ट रूप से दो खेमों में बंटती नजर आ रही हैं:

अमेरिका और पश्चिमी शक्तियाँ:- अमेरिकी राष्ट्रपति ने भूमध्य सागर में अपने दो बड़े ‘एयरक्राफ्ट कैरियर’ तैनात कर दिए हैं, जो इसरायल की रक्षा के लिए किसी भी क्षण कार्यवाई को तैयार हैं|

रूस और चीन का गठबंधन:- रूस ने ईरान को अपना आधुनिक ‘S-400 मिसाईल डिफेंस सिस्टम’ देने का वादा हैं, वहीं चीन ने कुटनीतिक शांति की बात करते हुए पर्दे के पीछे से ईरान के तेल निर्यात को जारी रखा हैं ताकि ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह न ढह जाये|

 

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