गाजीपुर: ‘रक्तदान बना जीवनदान’- सिविल डिफेंस की बड़ी पहल, 15 यूनिट रक्त से जगी जरुरतमंदों की उम्मीद

गाजीपुर: ‘रक्तदान बना जीवनदान’- सिविल डिफेंस की बड़ी पहल,

Ghazipur Civil Defense volunteers donating 15 units of blood at district hospital.
गाजीपुर: सिविल डिफेंस के वालंटियर्स ने 15 यूनिट रक्तदान कर पेश की मानवता की मिसाल|

गाजीपुर, उत्तर प्रदेश: ### भूमिका: सेवा का न्य अध्याय:-

उत्तर प्रदेश के एतिहासिक जिले गाजीपुर में मानवता की एक ऐसी मिसाल पेश की गई हैं, जिसकी चर्चा आज हर गली-मोहल्ले में हो रही हैं| ‘बहादुरों की धरती’ कहे जाने वाले गाजीपुर ने एक बार फिर साबित कर दिया हैं कि यहाँ के लोग न केवल सरहद पर जान देना जानते हैं, बल्कि समाज में जान बचाना भी उनकी प्राथमिकता हैं| सिविल डिफेंस (नागरिक सुरक्षा) गाजीपुर की ओर से आयोजित रक्तदान शिविर ने जिले के स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को एक नई ताकत दी हैं| 15 यूनिट रक्त का दान सुनने में शायद एक संख्या लगे, लेकिन चिकित्सा विज्ञान की दृष्टि से यह 15 परिवारों के बुझते हुए चिरागों को रोशन करने के समान हैं|

1. सिविल डिफेंस: रक्षक की भूमिका में:-

सिविल डिफेंस का नाम आते ही हमारे मन में युद्ध या प्राकृतिक आपदा के समय बचाव कार्य करने वाले स्वयंसेवकों की छवि उभरती हैं| लेकिन गाजीपुर यूनिट ने इस परिभाषा को और व्यापक बना दिया हैं| गाजीपुर के नागरिक सुरक्षा विभाग ने यह समझा कि वर्तमान समय में ‘रक्त की कमी’ भी किसी आपदा से कम नहीं हैं|

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अक्सर देखा जाता हैं कि जिला अस्पतालों में एक्सीडेंटल केस, प्रसव के दौरान महिलाओं को होने वाली रक्तस्राव की समस्या, और थैलेसिमिया से पीड़ित बच्चों के लिए रक्त की तत्काल आवश्यकता होती हैं| जब ब्लड में स्टॉक कम होता हैं, तो गरीब परिवारों के लिए भटकने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता| इसी ‘गैप’ को भरने के लिए सिविल डिफेंस गाजीपुर ने ‘रक्तदान – जीवनदान’ अभियान की शुरुआत की|

2. आयोजन की पूरी रुपरेखा:-

इस शिविर का आयोजन जिला मुख्यालय स्थित ब्लड बैंक के समन्वय से किया गया| सुबह से ही सिविल डिफेंस के वार्डन, स्वयंसेवक और युवा सदस्य भारी उत्साह के साथ जुटने लगे थे|

पंजीकरण और जांच प्रक्रिया:-

रक्तदान की प्रक्रिया को अत्यंत पारदर्शी और सुरक्षित रखा गया| शिविर में आने वाले प्रत्येक वालंटियर का सबसे पहले वजन, रक्तचाप (Blood Pressure) और हिमोग्लोबिन स्तर जांचा गया| डॉक्टरो ने यह सुनिश्चित किया कि केवल वही व्यक्ति रक्तदान करे जो शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट हो|

  • 15 यूनिट का संग्रह:- कुल 15 स्वस्थ स्वयंसेवकों ने सफलतापुर्वक रक्तदान किया|
  • विवध ब्लड ग्रुप:- इस संग्रह में O-Negative और B-Negative जैसे दुर्लभ ग्रुप्स पर भी ध्यान दिया गया, जिनकी उपलब्धता अक्सर कम होती हैं|

3. रक्तदान के वैज्ञानिक और सामाजिक लाभ:-

एक न्यू पोस्ट के माध्यम से जनता को जागरूक करना भी आवश्यक हैं| कई लोग रक्तदान से डरते हैं, जबकि विज्ञान इसके अनेक फायदे बताता हैं:

शारीरिक लाभ:- 

  • हृदय स्वास्थ्य:- नियमित रक्तदान से शरीर में आयरन की मात्र संतुलित रहती हैं, जिससे डील के दौरे का खतरा कम होता हैं|
  • नई कोशिकाओं का निर्माण:- रक्त देने के बाद शरीर तेजी से नया रक्त बनाता हैं, जिससे शरीर में स्फूर्ति आती हैं|
  • कैंसर के जोखिम में कमी:- शरीर में आयरन का स्तर सही रहने से कुछ प्रकार के कैसर का खतरा कम पाया गया हैं|

सामाजिक प्रभाव:-

जब समाज का एक प्रतिष्ठित संगठन जैसे सिविल डिफेंस रक्तदान करता हैं, तो यह समाज के अन्य वर्गो, विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता हैं| यह अंधविश्वासों को तोड़ता हैं कि रक्तदान करने से कमजोरी आती हैं|

4. गाजीपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था और चुनौती:-

गाजीपुर एक बड़ा जिला हैं जहाँ ग्रामीण आबादी का घनत्व अधिक हैं| यहाँ के जिला अस्पताल पर न केवल गाजीपुर बल्कि आसपास के जिलों के मरीजों का भी भार रहता हैं| ब्लड बैंक में अक्सर रक्त की कमी एक चुनौती बनी रहती हैं|

सिविल डिफेंस के चीफ वार्डन ने इस अवसर पर कहा:

“हमारा लक्ष्य केवल आज 15 यूनिट देना नहीं हैं, बल्कि एक ऐसा नेटवर्क तैयार करना हैं कि जब भी किसी को आधी रात को भी रक्त की जरूरत हो तो हमारा एक कॉल पर वालंटियर अस्पताल पहुँच सके| यह 15 यूनिट एक शुरुआत हैं|”

5. स्वयंसेवकों के अनुभव: ‘खून देकर मिली ख़ुशी’:-

शिविर में मौजूद 22 वर्षीय छात्र और सिविल डिफेंस वालंटियर राहुल ने बताया कि यह उनका पहला रक्तदान था| उन्होंने कहा, “शुरुआत में थोड़ा डर था, लेकिन सुई चुभने के बाद जो अहसास हुआ कि मेरा रक्त किसी भी की जान बचाएगा, वह अद्भुत हैं|”

इसी तरह, एक महिला वार्डन ने भी रक्तदान किया और संदेश दिया कि महिलाएं भी इस नेक काम में पीछे नहीं हैं| उनके अनुसार, समाज में यह भ्रान्ति हैं कि महिलाएं रक्तदान नहीं कर सकतीं, जबकि फिट होने पर वे भी आग्रणी भूमिका निभा सकती हैं|

6. सिविल डिफेंस का गौरवशाली इतिहास:-

भारत में सिविल डिफेंस की स्थापना नागरिक सुरक्षा के उद्देश्य से की गई थी| 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद इसे और मजबूती मिली| गाजीपुर में इसकी ईकाई हमेशा से सक्रिय रही हैं| चाहे बाढ़ राहत कार्य हो या कोविड-19 महामारी के दौरान लोगो तक राशन पहुँचाना, सिविल डिफेंस ने हमेशा शासन-प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया हैं| अब ‘रक्तदान’ को अपनी कार्यसूची में शामिल करना उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता हैं|

7. भविष्य की योजनाएं: एक बड़ी उम्मीद:-

जिला प्रशासन ने भी सिविल डिफेंस की इस पहल की सराहना की हैं| आने वाले समय में गाजीपुर के हर तहसील स्तर पर ऐसे छोटे-छोटे शिविर लगाने की योजना हैं|

  • डिजिटल डेटाबेस:- सिविल डिफेंस एक ऐसा डेटाबेस बना रहा हैं जहाँ सभी वालंटियर्स के ब्लड ग्रुप की जानकारी होती|
  • जागरूकता रैलियां:- गांव-गांव जाकर लोगों को रक्तदान के प्रति जागरूक किया जाएगा|

8. जनता से अपील: आप भी बनें इस श्रृंखला का हिस्सा:-

गाजीपुर के इस सराहनीय कार्य से हमें यह सीख लेनी चाहिए कि सरकार और प्रशासन के भरोसे बैठने के बजाय, समाज को खुद आगे आना होगा| यदि जिले का हर स्वस्थ युवा साल केवल डॉ बार रक्तदान करे, तो गाजीपुर में कभी भी रक्त की कमी से किसी की जान नहीं जाएगी|

सिविल डिफेंस ने 15 यूनिट देकर जो ‘बड़ी उम्मीद’ जगाई हैं, जो मशाल बनाकर पुरे जिले में फैलाने की जरूरत हैं| आज जो 15 यूनिट जमा हुई हैं, वे कल 150 और फिट 1500 यूनिट तक पहुँच सकती हैं, बशर्ते हम जागरूक हों|

उपसंहार:-

गाजीपुर सिविल डिफेंस की यह पहल ‘सेवा, सुरक्षा और सहायता’ के उनके मूल मंत्र को चरितार्थ करती हैं| 15 यूनिट रक्त भले ही एक छोटी कदम लगे, लेकिन यह उन मरीजों के लिए जीवनदान हैं जो मौत से जंग लड़ रहे हैं| गाजीपुर की इस खबर ने न केवल सुर्खियाँ बटोरी हैं, बल्कि लोगों के दिलों में एक सम्मानजनक स्थान भी बनाया हैं|

हमें उम्मीद हैं कि गाजीपुर की यह लहर पुरे प्रदेश में फैलेगी और ‘रक्तदान महादान’ का नारा हर घर तक पहुंचेगा|

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