Petrol-Diesel हुआ सस्ता!
देश भर के करोड़ों वाहन चालकों और आम लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई हैं| केंद्र सरकार की ओर से पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साईज ड्यूटी में बड़ी कटौती किए जाने के बाद ईंधन की कीमतों को लेकर चर्चा तेज हो गई हैं| सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर करीब 10-10 रूपये प्रति लीटर की एक्साईज ड्यूटी घटाने का फैसला किया हैं, जिसके बाद लोगों को उम्मीद हैं कि आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में और राहत मिल सकती हैं|
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हालांकि सोशल मीडिया और कई जगहों पर “22 रूपये सस्ता पेट्रोल-डीजल” होने का दावा किया जा रहा हैं, लेकिन आधिकारिक जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार ने एक्साईज ड्यूटी में 10 रूपये प्रति लीटर तक की कटौती की हैं| अलग-अलग राज्यों में टैक्स और वैट की व्यवस्था के कारण वास्तविक प्रभाव अलग हो सकता हैं|
सरकार ने क्यों लिया बड़ा फैसला?
पिछले कुछ समय से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा था| पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों के कारण तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा| इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली अतिरिक्त एक्साईज ड्यूटी में कमी करने का फैसला किया|
सरकार का कहना हैं कि इस कदम का उद्देश्य आम लोगों को महंगाई के दबाव से बचाना और तेल कंपनियों पर बढ़ रहे वित्तीय बोझ को कम करना हैं|
पेट्रोल और डीजल पर कितनी हुई कटौती?
सरकारी आदेश के अनुसार पेट्रोल पर लहने वाली विशेष अतिरिक्त एक्साईज ड्यूटी को 13 रूपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रूपये प्रति लीटर का दिया गया हैं| वहीं डीजल पर लगने वाली 10 रूपये प्रति लीटर की ड्यूटी को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया हैं|
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इस प्रकार दोनों ईंधनों पर करीब 10 रूपये प्रति लीटर की कर कटौती की गई हैं| हालांकि कई रिपोर्टो में यह भी कहा गया कि इसका पूरा लाभ तुरंत ग्राहकों तक नहीं पहुंचेगा क्योंकि इसका एक हिस्सा तेल कंपनियों के नुकसान की भरपाई में इस्तेमाल किया जा सकता हैं|
क्या तुरंत सस्ता होगा पेट्रोल और डीजल?
यह सबसे बड़ा सवाल हैं जो आम जनता के मन में हैं| सरकार द्वारा टैक्स घटाने के बावजूद कई रिपोर्टो में बताया गया कि खुदरा कीमतों में तुरंत बड़ी कमी देखने को नहीं मिल सकती| इसकी वजह यह हैं कि सरकारी तेल कंपनियाँ लंबे समय से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बढ़ी कीमतों का बोझ उठा रही थीं|
विशेषज्ञों का मानना हैं कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमते स्थिर रहती हैं तो आने वाले दिनों में ग्राहकों को सीधा फायदा मिल सकता हैं|
जनता ने ली राहत की साँस
ईंधन की कीमतें सीधे तौर पर आम आदमी के खर्चो को प्रभावित करती हैं| पेट्रोल और डीजल महंगे होने पर परिवहन लागत बढ़ जाती हैं, जिसका असर सब्जियों, खाद्य पदार्थो और रोजमर्रा की वस्तुओं पर भी पड़ता हैं|
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सरकार के इस फैसले के बाद लोगों में राहत का माहौल देखा जा रहा हैं| कई वाहन चालकों का कहना हैं कि यदि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और कमी आती हैं तो घरेलू बजट को काफी राहत मिलेगी| सोशल मीडिया पर भी इस फैसले को लेकर व्यापक चर्चा देखने को मिल रही हैं|
महंगाई पर क्या पड़ेगा असर?
भारत में डीजल का उपयोग माल ढुलाई और परिवहन क्षेत्र में सबसे ज्यादा होता हैं| ऐसे में डीजल की लागत कम होने से ट्रांसपोर्ट सेक्टर को राहत मिल सकती हैं| इसका असर धीरे-धीरे बाजार में वस्तुओं की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता हैं|
अर्थशास्त्रियों का मानना हैं कि ईंधन की लागत में कमी आने से महंगाई दर को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती हैं| हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव आने वाली महीनों में ही स्पष्ट होगा|
विपक्ष ने क्या कहा?
सरकार के इस फैसले पर विपक्षी दलों ने भी प्रतिक्रिया दी हैं| कुछ विपक्षी नेताओं का कहना हैं कि एक्साईज ड्यूटी में कटौती का पूरा लाभ आम जनता तक नहीं पहुँच रहा हैं| उनका दावा हैं कि यह कदम तेल कंपनियों को राहत देने के लिए अधिक उठाया गया हैं|
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हालांकि सरकार का कहना हैं कि यह फैसला देश के ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने और उपभोक्ताओं को भविष्य में संभावित बड़ी कीमत वृद्धि से बचाने के लिए लिया गया हैं|
अंतर्राष्ट्रीय बाजार का भी रहेगा असर
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात किए गए कच्चे तेल से पूरा करता हैं| ऐसे में वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में होने वाले बदलाव का सीधा असर देश के ईंधन बाजार पर पड़ता हैं|
यदि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव फिर से बढ़ सकता हैं| वहीं यदि कीमतों में गिरावट आती हैं तो उपभोक्ताओं को और राहत मिलने की संभावना रहेगी|
तेल कंपनियों को भी मिलेगा फायदा
सरकारी तेल कंपनियाँ लंबे समय से बढ़ी हुई वैश्विक कीमतों के कारण दबाव में थीं| सरकार का मानना हैं कि टैक्स में कटौती से कंपनियों के वित्तीय बोझ को कम करने में मदद मिलेगी और घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता भी बनी रहेगी|
निष्कर्ष:-
पेट्रोल और डीजल पर एक्साईज ड्यूटी में की गई बड़ी कटौती को आम जनता के लिए राहत भरे कदम के रूप में देखा जा रहा हैं| हालांकि “22 रूपये प्रति लीटर सस्ता” होने का दावा आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हुआ हैं, लेकिन सरकार ने दोनों ईंधनों पर लगभग 10-10 रूपये प्रति लीटर की एक्साईज ड्यूटी घटाई हैं| आने वाले समय में वैश्विक तेल कीमतों और सरकारी नीतियों के आधार पर उपभोक्ताओं को और राहत मिल सकती हैं| फ़िलहाल इस फैसले ने महंगाई से जूझ रहे लोगों को उम्मीद जरुर दी हैं कि ईंधन की कीमतों में स्थिरता आएगी और घरेलू बजट पर दबाव कुछ कम होगा|
