Election Live: लोकतंत्र का महापर्व! केरल में 90% वोटिंग का अनुमान

नई दिल्ली/गुवाहाटी/तिरुवनंतपुरम: आज देश के तीन महत्वपूर्ण राज्यों- असम, केरल और पुडुचेरी- में लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव मनाया जा रहा हैं| सुबह से ही मतदान केंद्रों के बाहर लंबी कतारें इस बात का प्रमाण हैं कि जनता अपने भविष्य को लेकर कितनी जागरूक हैं| चुनाव आयोग (ECI) के ताजा आंकड़ों और जमीनी उत्साह को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना हैं कि इस बार वोटिंग के पिछले सभी रिकॉर्ड धवस्त हो सकते हैं|
केरल में एतिहासिक उत्साह: क्या छुएगा 90% का आंकड़ा:-
केरल, जो अपनी उच्च साक्षरता दर और राजनीतिक जागरूकता के लिए जाना जाता हैं, आज एक बार फिर इतिहास रचने की ओर अग्रसर हैं| चुनाव आयोग के शुरूआती अनुमानों के अनुसार, केरल में मतदान का प्रतिशत 90% तक पहुँच सकता हैं|
मुख्य बातें:
- दिग्गजों की साख दाँव पर:- मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, विपक्ष के नेता और भाजपा के प्रमुख चेहरों ने सुबह-सुबह अपने मताधिकार का प्रयोग किया|
- युवा और बुजुर्गो में होड़:- तिरुवनंतपुरम से लेकर कासरगोड तक, 90 साल के बुजुर्गो और पहली बार वोट देने वाले युवाओं में समान उत्साह देखा गया|
- त्रिकोणीय मुकाबला:- जहाँ पारंपरिक रूप से लड़ाई LDF और UDF के बीच रही हैं, वहीं इस बार भाजपा के नेतृत्व वाले NDA ने मुकाबले को कई सीटों पर त्रिकोणीय बना दिया हैं|
असम में ‘बंपर’ वोटिंग: 75% के पार पहुंचा आंकड़ा:-
पूर्वोत्तर के प्रवेश द्वार असम में आज तीसरे चरण के तहत भारी मतदान हो रहा हैं| ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य में मतदान का प्रतिशत 75% को पार कर चूका हैं और शाम तक इसके और बढ़ने की संभावना हैं|
असम के चुनावी समीकरण:-
- सुरक्षा के कड़े इंतजाम:- संवेदनशील इलाकों में ड्रोन और अर्धसैनिक बलों की तैनाती के बावजूद मतदाताओं के हौसले पस्त नहीं हुए|
- स्थानीय मुद्दे हावी:- यहाँ CAA, NRC और विकास के साथ-साथ रोजगार के मुद्दों पर जनता मुखर दिखी|
- बड़ी हस्तियों का वोट:- मुख्यमंत्री और अन्य कैबिनेट मंत्रियों ने कतार में लगकर अपनी बारी का इंतजार किया, जो लोकतंत्र की एक सुखद तस्वीर पेश करता हैं|
पुडुचेरी: छोटा राज्य, बड़ा जनादेश:-
केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में भी मतदाताओं ने जबरदस्त प्रतिक्रिया दी हैं| यहाँ की सभी विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में चुनाव हो रहे हैं| दोपहर तक यहाँ भी मतदान का ग्राफ तेजी से ऊपर गया हैं| मछुआरा समुदायों और ग्रामीण क्षेत्रों में भारी मतदान की खबरें आ रही हैं|
चुनाव आयोग (ECI) की मुस्तैदी और नई तकनीक:-
चुनाव आयोग ने इस बार मतदान को सुगम बनाने के लिए कई नई पहल की हैं:
- पिंक बूथ:- महिला मतदाताओं को प्रोत्साहित करने के लिए ‘सखी’ या पिंक बूथ बनाए गए हैं, जिनका प्रबंधन पूरी तरह महिलाओं के हाथ में हैं|
- दिव्यंगों के लिए सुविधा:- व्हीलचेयर और वालंटियर्स की मदद से बुजुर्गो और दिव्यगों को वोट डालने में कोई परेशानी नहीं हुई|
- वेबकास्टिंग:- पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अधिकांश बूथों की लाइव वेबकास्टिंग की जा रही हैं|
विश्लेषण: भारी मतदान का क्या हैं मतलब:-
राजनीतिक पंडितों के अनुसार, जब भी मतदान का प्रतिशत इतना अधिक होता हैं, तो इसके डॉ गहरे मतलब निकाले जाते हैं| या तो जनता वर्तमान सरकार के काम से बेहद खुश होकर उसे दोहराना चाहती हैं, या फिर व्यवस्था परिवर्तन (Anti-incumbency) की एक जबरदस्त लहर चल रही हैं|
- केरल में:- क्या 90% वोटिंग पिनाराई विजयन की वापसी कराएगी या कांग्रेस नीत गठबंधन बाजी मारेगा|
- असम में:- क्या भाजपा अपनी सत्ता बरकरार रख पाएगी या ‘महाजोत’ का गठबंधन कोई बड़ा उलटफेर करेगा|
मतदाताओं की आवाज: ‘विकास और शांति’ प्राथमिकता:-
मतदान केंद्रों के बादर मीडिया से बात करते हुए लोगों ने अपनी प्राथमिकताएँ स्पष्ट कीं| केरल के एक युवा वोटर ने कहा, “हमें ऐसी सरकार चाहिए जो रोजगार के अवसर पैदा करे|” वहीं असम में एक महिला मतदाता ने बताया, “हमारे लिए शांति और सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा हैं|”
महिला मतदाताओं की निर्णायक भूमिका:-
इस बार के चुनावों में एक खास ट्रेंड देखा जा रहा हैं- वह हैं महिला मतदाताओं की भारी भागीदारी| केरल और असम दोनों ही राज्यों मे पुरुषों की तुलना में महिला मतदाताओं की कतारें लंबी देखि गई| चुनाव आयोग के अनुसार, क्यों ग्रामीण बूथों पर महिलाओं का टर्नआउट पुरुषों से 3-5% अधिक रहने का अनुमान हैं| यह साईलेंट वोटर फैक्टर किसी भी पार्टी का समीकरण बना या बिगाड़ सकता हैं, क्योंकि महिलाऐं अक्सर कल्याणकारी योजनाओं और सुरक्षा के मुद्दे पर वोट करती हैं|
तकनीक और सोशल मीडिया का प्रभाव:-
यह पहली बार हैं जब इन राज्यों में डिजिटल कैंपेनिंग और रियल-टाइम अपडेट्स का इतना बड़ा प्रभाव देखा गया हैं| चुनाव आयोग ने ‘C-Vigil’ एप के माध्यम से आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की| इसके अलावा, मतदान केंद्रों पर QR कोड आधारित वोटर स्लिप और डिजिटल पहचान पत्रों के उपयोग ने प्रक्रिया को काफी तेज कर दिया हैं, जिससे 90% जैसे विशाल वोटिंग लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिली|
