मेरठ एक्सप्रेसवे का हरिद्वार तक विस्तार:
Ganga Expressway Extension 2026: उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी परियोजना सामने आई हैं| गंगा एक्सप्रेसवे को मेरठ से आगे बढ़ाकर हरिद्वार तक जोड़ने की योजना पर मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को होने वाली योगी आदित्यनाथ सरकार की कैबिनेट बैठक में फैसला होने की संभावना हैं| प्रस्तावित विस्तार से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर, अमरोहा और बिजनौर जैसे क्षेत्रों को हरिद्वार से तेज और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद हैं|
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी UPEIDA की प्रस्तावित परियोजनाओं में भी मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेसवे को शामिल किया गया हैं|
गंगा एक्सप्रेसवे का हरिद्वार तक क्यों महत्वपूर्ण हैं विस्तार?
गंगा एक्सप्रेसवे फ़िलहाल मेरठ से प्रयागराज तक लगभग 594 किलोमीटर लंबे कॉरीडोर के रूप में विकसित किया गया हैं| इसके हरिद्वार तक विस्तार की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल 2026 को गंगा एक्सप्रेसवे के उद्धाटन के दौरान की थी| अब प्रस्तावित मेरठ-हरिद्वार लिंक के जरिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश को उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्र हरिद्वार से सीधे जोड़ने की योजना हैं|
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प्रस्तावित लिंक करीब 147 किलोमीटर लंबा और छह लेन वाला ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे हो सकता हैं| भविष्य में इसे आठ लेन तक विस्तारित करने का प्रावधान भी रखा जा सकता हैं| परियोजना की अनुमानित लागत करीब 10,760 करोड़ रूपये बताई जा रही हैं|
कहा से शुरू होगा मेरठ-हरिद्वार लिंक?
प्रस्तावित नए कॉरिडोर का रूट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों से होकर गुजरने की योजना हैं| उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसका एक प्रमुख शुरूआती बिंदु मेरठ जिले के बिजौली गांव के आसपास प्रस्तावित हैं| इसके बाद मार्ग मेरठ के अन्य इलाकों से होते हुए मुजफ्फरनगर और फिर बिजनौर की तरफ बढ़ेगा|
अलग-अलग चरणों में हुए सर्वे और एलाइनमेंट में कुछ बदलाव भी किए गए हैं| हाल की रिपोर्टो में बिजनौर के मंडावर और चांदपुर क्षेत्र को नए एलाइनमेंट से जोड़े की जानकारी सामने आई हैं|
मेरठ के इन क्षेत्रों को मिल सकती हैं कनेक्टिविटी
मेरठ जिले में प्रस्तावित रूट के तहत बिजौली, खरखौदा, मवाना और हस्तिनापुर के आसपास के क्षेत्रों को कनेक्टिविटी मिलने की संभावना बताई गई हैं| कुछ रिपोर्टो में मेरठ के रोहटा, जानी और दौराला क्षेत्र का भी उल्लेख किया गया हैं|
हालांकि यहाँ यह समझना ज़रूरी हैं कि गाँवों की अंतिम सूची भूमि अधिग्रहण से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना के बाद ही निश्चित मानी जाएगी| इसलिए अभी सामने आ रहे गाँवों के नामों को संभावित रूट के रूप में देखना उचित हैं|
मुजफ्फरनगर से होकर आगे बढ़ेगा एक्सप्रेसवे
मेरठ के बाद प्रस्तावित कॉरिडोर मुजफ्फरनगर क्षेत्र की ओर बढ़ने की योजना हैं| मुजफ्फरनगर को इस रूट का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा हैं| यहाँ खतौली, जानसठ और आसपास के इलाकों से होकर मार्ग आगे बढ़ सकता हैं|
रिपोर्टो के मुताबिक सकौती, मंसूरपुर और तितावी के आसपास के क्षेत्र तथा जानसठ के ककरौली और भोपा के नजदीकी गाँवों का भी प्रस्तावित एलाइनमेंट से संबंध बताया गया हैं| इसके बाद कॉरिडोर अपर गंगा कैनाल के आसपास से मुजफ्फरनगर-बिजनौर सीमा की दिशा में द्भ्ने की संभावना हैं|
अमरोहा और बिजनौर को मिलेगा बड़ा फायदा
गंगा एक्सप्रेसवे के प्रस्तावित विस्तार से अमरोहा और बिजनौर को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद हैं| उपलब्ध योजना के अनुसार हरिद्वार की ओर जाने वाला लिंक अमरोहा के रिखालू गांव के आसपास से शुरू होकर बिजनौर की दिशा में आगे बढ़ सकता हैं|
अमरोहा में पहले से ही प्रस्तावित विस्तार के लिए संबंधित गाँवों के नक्शों और बंदोबस्ती रिकॉर्ड से जुड़ी प्रक्रिया की खबरें सामने आ चुकी हैं| अप्रैल 2026 की रिपोर्टो में अमरोहा से हरिद्वार के बीच लगभग 62 गाँवों से जुड़े सर्वे और नक्शों का उल्लेख किया गया था|
बिजनौर के मंडावर, नांगल सोती और किरतपुर क्षेत्र महत्वपूर्ण
बिजनौर में प्रस्तावित रूट मंडावर, नांगल सोती और कीरतपुर क्षेत्र की तरफ बढ़ने की संभावना हैं| इसके बाद मार्ग उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड सीमा की ओर जाएगा|
बिजनौर के लिए यह परियोजना एसलिय महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं क्योंकि जिले को बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क से बेहतर सीधी कनेक्टिविटी मिल सकती हैं| इससे यात्रियों के साथ-साथ कृषि उत्पादों, स्थानीय व्यापार और पर्यटन से जुड़े परिवहन को भी फायदा मिलने की उम्मीद हैं|
हाल ही में बिजनौर में गंगा एक्सप्रेसवे के एलाइनमेंट को अंतिम रूप देने और जमीन अधिग्रहण की तैयारी से संबंधित रिपोर्ट भी सामने आई हैं|
हरिद्वार तक पहुंचेगा नया हाईस्पीड कॉरिडोर
बिजनौर से आगे प्रस्तावित एक्सप्रेसवे उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश करेगा| उपलब्ध योजना के अनुसार उत्तर प्रदेश में इसका लगभग 117 किलोमीटर हिस्सा और उत्तराखंड ले लगभग 30 किलोमीटर हिस्सा हो सकता हैं|
उत्तराखंड में यह कॉरिडोर हरिद्वार के नूरपुर पंजनहेड़ी गांव के आसपास निर्माणाधीन हरिद्वार बाईपास से जुड़ने की योजना हैं| इससे मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हरिद्वार की यात्रा के लिए एक नया तेज मार्ग उपलब्ध हो सकता हैं|
हरिद्वार के किन क्षेत्रों को मिल सकती हैं कनेक्टिविटी?
हरिद्वार जिले में लक्सर क्षेत्र के गाँवों, रुड़की के बाहरी इलाकों तथा बहादराबाद और ज्वालापुर के आसपास के क्षेत्रों को प्रस्तावित नेटवर्क से जोड़ने की संभावना बताई गई हैं|
यह कनेक्टिविटी खासतौर पर धार्मिक पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती हैं| हरिद्वार देश के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में शामिल हैं और यहाँ वर्षभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँचते हैं| बेहतर एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच सड़क यातायात को नया विकल्प मिल सकता हैं|
करीब 100 गाँवो से जुड़ सकता हैं प्रोजेक्ट
प्रस्तावित मेरठ-हरिद्वार लिंक के लिए करीब 100 गाँवो के प्रभावित या संबंधित होने की संभावना विभिन्न रिपोर्टो में बताई गई हैं| हालांकि अभी सभी गाँवों की अंतिम आधिकारिक सूची सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं मानी जानी चाहिए|
कैबिनेट से संबंधित निर्णय और भूमि अधिग्रहण के लिए आवश्यक सरकारी अधिसूचनाओं के बाद राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर गावों और जमीन की अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आएगी| इसलिए किसानों और जमीन मालिकों को अंतिम सूची के लिए संबंधित जिला प्रशासन तथा आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करना चाहिए|
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच पहले ही बनी सहमती
हरिद्वार तक इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच समन्वय की प्रक्रिया भी आगे बढ़ चुकी हैं| अगस्त 2026 की रिपोर्टो के अनुसार दोनों राज्यों के बीच परियोजना को लेकर जिम्मेदारियां तय करने की दिशा में समझौता हुआ हैं|
रिपोर्टो में बताया गया कि उत्तराखंड पर निर्माण का वित्तीय भार नहीं होगा, जबकि भूमि अधिग्रहण और उपयोगिता स्थानांतरण जैसे कार्यो में राज्य सहयोग करेगा| इससे दोनों राज्यों के बीच परियोजना के क्रियान्वयन का रास्ता साफ होने की उम्मीद हैं|
निष्कर्ष:-
गंगा एक्सप्रेसवे का मेरठ से हरिद्वार तक प्रस्तावित विस्तार पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच कनेक्टिविटी के लिहाज से बड़ी परियोजना बन सकता हैं| करीब 147 किलोमीटर लंबे छह लेन वाले प्रस्तावित लिंक से मेरठ, मुजफ्फरनगर, अमरोहा और बिजनौर जैसे क्षेत्रों को हरिद्वार से जोड़ने की योजना हैं|
हालांकि गाँवों की अंतिम सूचि, भूमि अधिग्रहण और परियोजना की अगली समयसीमा को लेकर आधिकारिक अधिसूचनाओं का इंतजार करना ज़रूरी हैं| 25 अगस्त की कैबिनेट बैठक में होने वाला निर्णय इस परियोजना की अगली दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगा|
