विशेष रिपोर्ट: पश्चिम एशिया में महायुद्ध – ईरान, इसरायल और अमेरिका के बीच अब तक क्या-क्या हुआ?

पश्चिम एशिया (Middle East) इस समय बारूद के ढेर पर बैठा हैं| पिछले कुछ महीनों में ईरान, इसरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच जो तनाव शुरू हुआ था, उसने अब एक भयानक युद्ध का रूप ले लिया हैं| इस संघर्ष ने न केवल इन तीन देशों को, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और शांति को खतरे में डाल दिया हैं| आईए विस्तार से समझते हैं कि इस युद्ध की शुरुआत कैसे हुई और अब तक रणभूमि में क्या-क्या घटित हो चूका हैं|

1. युद्ध की पृठभूमि: तनाव की चिंगारी कैसे भड़की?

इस महायुद्ध की जड़ें अक्टूबर 2023 के हमास-इसरायल संघर्ष में छिपीं थी, लेकिन 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत में स्थिति तब नियन्त्रण से बाहर हो गई जब ईरान के परमाणु कार्यक्रमों और उसके समर्थिक गुटों (हिजबुल्लाह, हुती और हमास) पर इसरायल ने सीधे हमले तेज कर दिए|

मुख्य मोड़ तब आया जब इसरायल ने सीरिया और लेबनान में ईरान के शीर्ष कमांडरो को निशाना बनाया| इसके जवाब में ईरान ने सीधे अपनी धरती से इसरायल पे मिसायल दागने का फैसला किया, जिससे अमेरिका को सीधे तौर पर युद्ध में कूदना पड़ा|

2. ईरान का ‘ऑपरेशन ट्रू प्रामिस 3’ और इसरायल की प्रतिक्रिया

जनवरी 2026 के मध्य में, ईरान ने अपनी ‘फतेह’ और ‘खैबर शेकन’ जैसी हाईपरसोनिक मिसाईलों से इसरायल के तेल अवीव और नेवातिम एयरबेस पर हमला किया| ईरान का दावा था उसने इसरायल के आयरन डोम और एरो-3 डिफेंस सिस्टम को भेद दिया हैं|

इसके जवाब में, इसरायल ने ‘ऑपरेशन आयरन स्वाडर्स 2.0’ शुरू किया| इसरायल वायुसेना (IAF) ने ईरान के भीतर स्थित इस्फहान और नतांज के परमाणु केन्द्रों के पास बमबारी की| इसरायल का कहना हैं कि उसने ईरान की कमर तोड़ दी हैं, जबकि ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताया|

3. अमेरिका की एंट्री: “बूट्स ऑन द ग्राउंड” का खतरा

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में अमेरिका ने इस बार केवल कुटनीतिक समर्थन तक खुद को सीमित नहीं रखा|

  • नौसैनिक घेराबंदी: अमेरिका ने अपने दो विमानवाहक पोत (Aircraft Carriers) ‘यूएसएस गोराल्ड फोर्ड” और यूएसएस अब्राहम लिंकन को फारस की खाड़ी में तैनात कर दिया हैं|
  • सीधे हमले: अमेरिकी बी-2 स्पिरिट स्टील्थ बाम्बर्स ने ईरान के भूमिगत मिसाईल ठिकानों पर ‘बंकर बस्टर’ बमों से हमला किया हैं|
  • ट्रंप का कड़ा रुख: आज, 3 मार्च 2026 को व्हाईट हॉउस से आए बयान में राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया हैं कि यदि ईरान पीछे नहीं हटा, तो अमेरिका “बूट्स ऑन द ग्राउंड” (जमीनी सेना) भेजने से पीछे नहीं हटेगा|

4. अब तक की बड़ी सैन्य घटनाएँ (Timeline of Conflict)

पिछले कुछ हफ्तों में कई ऐसी घटनाएँ हुई हैं जिन्होंने दुनिया को दहला दिया हैं:

  • कुवैत में फ्रेंडली फायर: हाल ही में एक बड़ी दुर्घटना हुई जब कुवैत की रक्षा प्रणालियों ने गलती से तीन अमेरिकी F-15 फाईटर जेट्स को निशाना बना लिया| इसे युद्ध के इतिहास की सबसे बड़ी ‘फ्रेंडली फायर’ घटनाओं में से एक माना जा रहा हैं|
  • लाल सागर (Red Sea) की घेराबंदी: ईरान समर्थित हुती विद्रोहियों ने बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद कर दिया हैं| इसके परिणामस्वरूप अमेरिका और ब्रिटेन के कई मालवाहक जहाजों को ड्रोन हमलों से डुबो दिया गया हैं|
  • रियाद पर ड्रोन हमला: सऊदी अरब की राजधानी रियाद में स्थित अमेरिकी दूतावास पर भी ड्रोन हमला हुआ, जिससे वहां भीषण आग लग गई| हालांकि, सऊदी अरब ने अब तक इस युद्ध में सीधे शामिल होने से परहेज किया हैं|

5. मानवीय और आर्थिक क्षति: दुनिया पर असर

इस युद्ध ने केवल सैनिकों को ही नहीं, बल्कि आम जनता को भी बुरी तरह प्रभावित किया हैं:

  • शरणार्थी संकट: लेबनान और ईरान के सीमावर्ती इलाकों से लाखों लोग पलायन कर रहे हैं| संयुक्त राष्ट्र (UN ) ने इसे इस दशक का सबसे बड़ा मानवीय संकट घोषित किया हैं|
  • तेल की कीमतों में आग: ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने की धमकी के बाद कच्चे तेल की कीमते 150 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गई हैं| भारत जैसे देशों में पेट्रोल-डीजल की किल्लत शुरू हो गई हैं|
  • विमानन सेवा ठप: आज की रिपोर्ट के अनुसार, एयर इंडिया समेत दुनिया भर की 350 से अधिक एयरलाइनों ने पश्चिम एशिया के ऊपर से उड़ान भरना बंद कर दिया हैं, जिससे वैश्विक यात्रा व्यवस्था चरमरा गई हैं|

6. वैश्विक शक्तियों का रुख: रूस और चीन की भूमिका

इस त्रिकोणीय युद्ध में रूस और चीन की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई हैं| रूस ने ईरान को अपना उन्नत ‘S-400’ मिसाईल डिफेंस सिस्टम और सुखोई-35 (Su-35) लड़ाकू विमान दिए हैं| वहीं, चीन ने अमेरिका को चेतावनी दी हैं कि वह इस क्षेत्र में हस्तक्षेप बंद करे, अन्यथा उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे| पाकिस्तान ने भी अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की हैं|

7. क्या यह विश्व युद्ध 3 की शुरुआत हैं?

रणनीतिकारों का मानना हैं कि यदि इस युद्ध को अगले 48 घंटो में नहीं रोका गया, तो यह तीसरे विश्व युद्ध (World War 3 ) में तब्दील हो सकता हैं| इसरायल के पास परमाणु हथियार होने की अटकलें और ईरान का परमाणु शक्ति बनने की दहलीज पर होना, इस स्थिति को और भी डरावना बनाता हैं|

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की हैं और कहा हैं कि “यह युग युद्ध का नहीं हैं|” भारत इस समय ईरान में फंसे अपने हजारों नागरिकों को निकालने के लिए ‘ऑपरेशन गंगा 2.0’ जैसे किसी मिशन की योजना बना रहा हैं|

शांति की उम्मीद धुंधली:-

आज 3 मार्च 2026 की स्थिति के अनुसार, कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हैं| इसरायल अपनी सुरक्षा के लिए ईरान को पूरी तरह निहत्था करना चाहता हैं, जबकि ईरान अपनी ‘प्रतिष्ठा’ के लिए अमेरिका को क्षेत्र से बाहर करना चाहता हैं| अमेरिका के लिए यह युद्ध उसकी महाशक्ति (Superpower) वाली छवि को बनाए रखने की चुनौती बन गया हैं|

आने वाले दिन यह तय करेनेग कि क्या कूटनीति इस बार बारूद को शांत कर पाएगी या मानवता एक और बड़े विनाश की ओर बढ़ेगी|

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