बिहार में ‘सियासी भूचाल’: कौन होगा नया मुख्यमंत्री? सस्पेंस के बीच NDA की बैठक, नितीश के अगले कदम पर टिकीं सबकी निगाहें

बिहार में ‘सियासी भूचाल’: कौन होगा नया मुख्यमंत्री? सस्पेंस के बीच NDA की बैठक

पटना में बिहार विधानसभा के बाहर नितीश कुमार की गाड़ी के पास मीडियाकर्मियों की भीड़
पटना: बिहार विधानसभा के बाहर मुख्यमंत्री नितीश कुमार की गाड़ी को घेरते मीडियाकर्मि| नए मुख्यमंत्री को लेकर राज्य में सस्पेंस गहरा गया हैं|

पटना/नई दिल्ली: बिहार की सियासत में एक बार फिर वही अनिश्चितता और गहमागहमी a=लौट आई हैं, जिसके लिए यहाँ की राजनीति जानी जाती हैं| पिछले 24 घंटों से पटना से लेकर दिल्ली तक बैठकों का दौर जारी हैं| कयासों का बाजार गर्म हैं कि क्या बिहार को आज एक नया मुख्यमंत्री मिलने जा रहा हैं, मुख्यमंत्री पद को लेकर बना यह सस्पेंस अब अपने चरम पर हैं|

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इस विशेष रिपोर्ट में हम बिहार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, संभावित नामों और आने वाले बड़े बदलावों का बारीकी से विश्लेषण करेंगे|

1. सस्पेंस की शुरुआत: आखिर क्यों उठी नए मुख्यमंत्री की मांग:-

बिहार की राजनीति में बदलाव की सुगबुगाहट तब शुरू हुई जब सत्ताधारी गठबंधन (NDA) के भीतर आंतरिक मतभेदों की ख्ब्रेंसमने आई| सूत्रों के अनुसार, गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच प्रशासनिक फैसलों और आगामी चुनावों की रणनीति को लेकर असहमति बनी हैं| इसी बीच, भाजपा आलाकमान की सक्रियता और पटना में ‘सस्पेंस’ वाली ख़ामोशी ने इस आग में घी डालने का काम किया हैं|

मुख्यमंत्री नितीश कुमार, जो पिछले कई दशकों से बिहार की राजनीति की धुरी बने हुए हैं, उनके अगले कदम को लेकर हर कोई असमंजस में हैं| क्या वह फिर से पाला बदलेंगे या इस बार NDA के भीतर ही नेतृत्व परिवर्तन की सहमति बनेगी|

2. मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे कौन:-

सस्पेंस के बीच गलियारों में कुछ नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं| अगर नेतृत्व परिवर्तन होता हैं, तो ये चेहरे बिहार की कमान संभाल सकते हैं:

  • सम्राट चौधरी:- बिहार भाजपा अध्यक्ष और वर्तमान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम इस रेस में सबसे ऊपर माना जा रहा हैं| उनके आक्रामक तेवर और पिछड़ा वर्ग (OBC) पर उनकी पकड़ उन्हें भाजपा की पहली पसंद बनाती हैं|
  • विजय कुमार सिन्हा:- सदन के अनुभवी नेता और वर्तमान उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा भी एक मजबूत दावेदार हैं| उनके प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती हैं|
  • नित्यानंद राय:- केन्द्रीय राजनीति में सक्रिय नित्यानंद राय को दिल्ली का करीबी माना जाता हैं| अगर भाजपा पूरी तरह से कमान अपने हाथ में लेती हैं, तो राय एक ‘सरप्राइज’ कार्ड साबित हो सकते हैं|

3. नितीश कुमार: ‘पल्टूराम’ का टैग या मजबूरी की राजनीति:-

नितीश कुमार की छवि बिहार में एक ऐसे नेता की रही हैं जो सत्ता के समीकरण बिठाने में माहिर हैं| विपक्ष उन्हें ‘पल्टूराम’ कहता हैं, लेकिन उनके समर्थक इसे ‘बिहार के हिट में लिया गया फैसला’ बताते हैं| इस बार का सस्पेंस इसलिए गहरा हैं क्योंकि जेडीयू (JDU) के भीतर भी दो फाड़ की खबरें हैं| कुछ विधायक मौजूदा गठबंधन से खुश नहीं हैं, जबकि कुछ नए विकल्पों की तलाश में हैं|

4. राजद (RJD) और तेजस्वी यादव का स्टैंड:-

इस पूरी उठापटक के बीच लालू प्रसाद यादव की पार्टी RJD ‘वेट एंड वाच’ (Wait and Watch) की मुद्रा में हैं| तेजस्वी यादव ने अपने विधायकों को पटना में ही रहने के निर्देश दिए हैं| राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना हैं कि अगर NDA के भीतर दरार पड़ती हैं, तो तेजस्वी यादव एक बार फिर सरकार बनाने का दावा पेश कर सहते हैं| बिहार विधानसभा के नंबर गेम को देंखें तो RJD अभी भी सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई हैं|

5. विधानसभा का गणित: किसके पास कितनी ताकत:-

बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों का गणित समझना ज़रूरी हैं| बहुमत के लिए 122 सीटों की आवश्यकता होती हैं|

  • NDA गठबंधन:- भाजपा, जेडीयू और अन्य छोटे दल मिलकर वर्तमान में बहुमत के आंकड़े से ऊपर हैं|
  • महागठबंधन:- RJD, कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियाँ भी आंकड़े के काफी करीब हैं| अगर जेडीयू के कुछ विधायक टूटते हैं या नितीश कुमार कोई अलग फैसला लेते हैं, तो बिहार में राष्ट्रपति शासन नौबत भी आ सकती हैं|

6. दिल्ली की सक्रियता: अमित शाह और जेपी नड्डा की भूमिका:-

भाजपा के शिर्ह्स नेतृत्व ने बिहार के मामले को पूरी तरह से अपने हाथ में ले लिया हैं| केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा लगातार बिहार के प्रभारी और प्रदेश नेताओं के संपर्क में हैं| दिल्ली में हुई हालिया बैठकों के बाद यह संकेत मिले हैं कि भाजपा अब बिहार में ‘बड़े भाई’ की भूमिका में रहना चाहती हैं और संभवतः अपना मुख्यमंत्री देखना चाहती हैं|

7. जनता की राय और जमीनी हकीकत:-

बिहार की जनता इस बार-बार होने वाले राजनीतिक बदलाव से थोड़ा थकी हुई नजर आती हैं| विकास कार्यो, शिक्षकों की भर्ती और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा होने के बजाय हेडलाइन्स केवल राजनीतिक उठापटक पर टिकी हैं| युवाओं का कहना हैं कि उन्हें स्थिर सरकार चाहिए जो रोजगार और शिक्षा पर ध्यान दे, न कि हर साल गठबंधन बदलने वाली राजनीति पर|

8. क्या होगा अगला कदम:-

आने वाले 48 घंटे बिहार के भविष्य के लिए निर्णायक होंगे| यहाँ तीन मुख्य संभावनाएं दिख रही हैं:

  1. नेतृत्व परिवर्तन:- नितीश कुमार इस्तीफा दें और भाजपा के किसी चेहरे को मुख्यमंत्री बनाया जाए, जिसमें जेडीयू का समर्थन बना रहे|
  2. मध्यावधि चुनाव:- अगर कोई भी दल बहुमत साबित करने की स्थिति में नहीं रहता, तो राज्यपाल विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर सकते हैं|
  3. नया गठबंधन:- नितीश कुमार एक बार फिर पाला बदलकर महागठबंधन के साथ जा सकते हैं (हालांकि इसकी संभावना इस बार कम लग रही हैं)|

9. प्रशासनिक कामकाज पर असर:-

राजनीतिक अनिश्चितता के कारण राज्य का प्रशासनिक ढांचा सुस्त पड़ गया हैं| कई अहम फाईलों पर दस्तखत रुके हुए हैं और नौकरशाही भी अगले आदेश का इंतजार कर रही हैं| बिहार जैसे राज्य के लिए, जहाँ विकास की रफ्तार तेज करने की जरूरत हैं, यह सस्पेंस हानिकारक साबित हो सकता हैं|

एक निर्णायक मोड़ पर बिहार:-

बिहार की राजनीति केवल सत्ता का खेल नहीं हैं, बल्कि यह देश की राजनीति को भी प्रभावित करती हैं| आने वाले समय में होने वाले लोकसभा चुनावों पर भी इस सस्पेंस का गहरा असर पड़ेगा| क्या नितीश कुमार अपनी प्रासंगिकता बचा पाएँगे, क्या भाजपा बिहार में अपना पहला मुख्यमंत्री देने में सफल होगी? इस सवालों के जवाब जल्द ही मिलने वाले हैं|

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