पंजाब में बड़ी आतंकी साजिश नाकाम: ISI समर्थित मॉड्यूल का पर्दाफाश

चंडीगढ़:- पंजाब में शांति व्यवस्था को भंग करने की एक और बड़ी विदेशी साजिश को पंजाब पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने नाकाम कर दिया हैं| सीमा पार बैठे आकाओं के इशारे पर काम कर रहे एक ISI समर्थित आतंकी माड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया हैं| सुरक्षा एजेंसियों की इस मुस्तैदी ने राज्य में होने वाली एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया हैं|
कैसे हुआ इस खतरनाक माड्यूल का खुलासा:-
पंजाब पुलिस की विशेष ईकाई (Counter Intelligence) को ख़ुफ़िया जानकारी मिली थी कि कुछ संदिग्ध युवक अमृतसर और फिरोजपुर के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय हैं| पुलिस ने जाल बिछाकर संदिग्धों को घेरा और प्रारंभिक छापेमारी में दो मुख्य गुर्गो को गिरफ्तार किया|
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तलाशी के दौरान इनके पास से 4 अत्याधुनिक हैंड ग्रेनेड, 2 विदेशी पिस्तौल (मैगनीज सहित) और भारी मात्र में जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं| शुरूआती जांच में यह बात सामने आई हैं कि ये हथियार ड्रोन के जरिए पाकिस्तान से भारतीय सीमा में गिराए गए थे|
ISI और आतंकी आकाओं का ‘स्लीपर सेल’ प्लान:-
जांच में खुलासा हुआ हैं कि इस माड्यूल के तार सीधे तौर पर पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI और वहां शरण लिए हुए प्रतिबंधित आतंकी संगठनो से जुड़े हैं| पकड़े गए आरोपियों ने कबूल किया हैं कि उन्हें पंजाब के भीडभाड़ वाले इलाकों, धार्मिक स्थलों और महत्वपूर्ण सरकारी भवनों को निशाना बनाने का निर्देश दिया गया था|
ड्रोन तकनीक का बढ़ता खतरा:- सीमा पार से हथियारों की तस्करी के लिए अब पारंपरिक रास्तों के बजाय उन्नत ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल हो रहा हैं| ये ड्रोन रात के अंधेरे में सीमा पार करते हैं और जीपीएस (GPS) लोकेशन के आधार पर हथियारों की डिलीवरी करते हैं| पंजाब पुलिस के अनुसार, इस माड्यूल को सक्रिय करने का मकसद आने वाले त्योहारों और महत्वपूर्ण राजनीतिक कार्यक्रमों के दौरान दहशत फैलाना था|
चंडीगढ़ ग्रेनेड हमले से जुड़े तार:-
सुरक्षा एजेंसियां इस बात की भी गहनता से जाँच कर रही हैं कि क्या इस माड्यूल का संबंध हाल ही में हुए चंडीगढ़ ग्रेनेड हमले से हैं| पकड़े गए आतंकियों के पास से मिले हथियारों की बनावट और तकनीक चंडीगढ़ हमले में इस्तेमाल किए गए विस्फोटकों से काफी मिलती-जुलती हैं| पुलिस को संदेह हैं कि पंजाब में सक्रिय कई ‘स्लीपर सेल’ एक ही बड़े नेटवर्क का हिस्सा हैं जो पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं से ‘सिग्नल’ या ‘टेलीग्राम’ जैसे एन्क्रिप्टेड एप्स के जरिए जुड़े हुए हैं|
सुरक्षा व्यवस्था और सीमा पर हाई अलर्ट:-
इस भंडाफोड़ के बाद पुरे पंजाब, विशेष रूप से अमृतसर, गुरदासपुर, पठानकोट और फिरोजपुर जिलो में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया हैं| सीमा सुरक्षा बल (BSF) और पंजाब पुलिस ने संयुक्त सर्च ऑपरेशन शुरू किया हैं|
- नाकाबंदी:- शहर के प्रवेश द्वारों और संवेदनशील रास्तों पर चेकिंग बढ़ा दी गई हैं|
- सीसीटीवी निगरानी:- सार्वजनिक स्थानों पर लगे कैमरों की बारीकी से जांच की जा रही हैं|
- जनता से अपील:- पुलिस महानिदेशक (DGP) ने जनता से अपील की हैं कि वे किसी भी लावारिस वस्तु को न छुएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत ‘112’ नंबर पर दें|
पंजाब में बढ़ती आतंकी चुनौतियाँ और सरकार का रुख:-
पिछले कुछ महीनों में पंजाब में ड्रोन के जरिए घुसपैठ और स्लीपर सेल की गतिविधियों में तेजी आई हैं| राज्य सरकार और केंद्र सरकार समन्वय के साथ इस खतरे से निपटने का प्रयास कर रही हैं| विशेषज्ञों का मानना हैं कि पंजाब को अस्थिर करने के लिए पाकिस्तान एक नई रणनीति पर काम कर रहा हैं, जिसमें वह स्थानीय अपराधियों को लालच देकर आतंकी गतिविधियों में शामिल कर रहा हैं|
एंटी-ड्रोन सिस्टम की जरूरत:- विशेषज्ञों का कहना हैं कि सीमा पर ‘एंटी-ड्रोन सिस्टम’ की तैनाती ही इस समस्या का स्थाई समाधान हैं| हालांकि कई जगहों पर जैमर्स लगाए गए हैं, लेकिन ड्रोन तकनीक के अपग्रेड होने के साथ सुरक्षा बलों को भी अपने उपकरणों को और आधुनिक बनाने की आवश्यकता हैं|
सुरक्षा की चुनौतियाँ और भविष्य की राह:-
पंजाब में ISI समर्थित इस बड़े आतंकी माड्यूल का पर्दाफाश होना केवल एक पुलिसिया कामयाबी नहीं हैं, बल्कि यह इस बात का भी संकेत हैं कि सीमा पार से भारत के खिलाफ रची जा रही साजिशें अब और भी ज्यादा जटिल और तकनीकी हो गई हैं| पिछले कुछ वर्षो में पंजाब ने जिस तरह से उग्रवाद और आतंकवाद के काले दौर को पीछे छोड़ा हैं, उसे फिर से अस्थिर करने की कोशिशें लगातार जारी हैं|
बदलता आतंकी नेटवर्क और ‘नार्को-आतंकवाद’ का खतरा:-
वर्तमान में सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती नार्को-आतंकवाद (Narco-Terrorism) हैं| जांच में यह बार-बार सामने आया हैं कि पाकिस्तान की ओर से भेजे जा रहे ड्रोन न केवल हथियार, बल्कि भारी मात्र में हेरोईन और अन्य नशीले पदार्थ भी गिरा रहे हैं| इस ड्रग्स की बिक्री से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण और स्थानीय युवाओं को लालच देकर उन्हें अपने जाल में फंसाने के लिए किया जा रहा हैं| पंजाब पुलिस की इस ताजा कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया हैं कि जब तक इस ड्रग्स और हथियार के गठजोड़ को पूरी तरह नहीं तोड़ा जाता, तब तक सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ बनी रहेंगी|
ड्रोन तकनीक: एक नई और गंभीर चुनौती:-
ड्रोन तकनीक ने सीमा सुरक्षा की परिभाषा बदल दी हैं| पहले जहाँ घुसपैठ के लिए कटीले तारों को पार करना पड़ता था, वहीं अब आतंकी तकनीक का सहारा लेकर मीलों दूर बैठकर हथियारों की खेप पहुंचा रहे हैं| हालांकि, भारतीय सुरक्षा बलों ने कई ड्रोंस को मार गिराने में सफलता हासिल की हैं, लेकिन घने कोहरे और रात के अंधेरे का फायदा उठाकर ये ड्रोन अभी भी एक बड़ा सिरदर्द बने हुए हैं| आने वाले समय में सीमावर्ती इलाकों में और भी सटीक ‘एंटी-ड्रोन लेजर सिस्टम’ और ‘एआई-आधारित रडार’ की तैनाती अनिवार्य हो गई हैं|