AAP में महाबगावत: राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों का BJP में विलय

नई दिल्ली/चंडीगढ़:- आम आदमी पार्टी (AAP) के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक भूकंप आया हैं| पार्टी के ‘पोस्टर बॉय’ माने जाने वाले राघव चड्ढा और रणनीतिकार संदीप पाठक समेत राज्यसभा के 7 सांसदों ने एक साथ पार्टी छोडकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दमन थाम लिया हैं| इस सामूहिक दलबदल ने न केवल दिल्ली बल्कि पंजाब की सियासत में भी हडकंप मचा दिया हैं|
कैसे हुआ यह “सियासी तख्तापलट?
शुक्रवार (24 अप्रैल 2026) को एक नाटकीय घटनाक्रम में राघव चड्ढा ने प्रेस कांफ्रेंस कर एलान किया कि AAP के 10 राज्यसभा सांसदों में से दो-तिहाई (7 सांसद) ने बीजेपी में विलय (Merge) करने का फैसला किया हैं|
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बीजेपी में शामिल होने वाले चेहरे:-
- राघव चड्ढा (Raghav Chadha)
- संदीप पाठक (Sandeep Pathak – AAP के संगठन मंत्री)
- हरभजन सिंह (Harbhajan Singh – पूर्व क्रिकेटर)
- स्वाति मालीवाल (Swati Maliwal)
- अशोक मित्तल (अशोक Mittal- लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर)
- राजेन्द्र गुप्ता (Rajendra Gupta)
- विक्रमजीत सिंह साहनी (Vikramjit Singh Sahney)
राघव चड्ढा ने क्या कहा?
राघव चड्ढा ने भावुक होते हुए कहा, “जिस पार्टी को हमने खून-पसीने से सींचा, अब वह अपने सिद्धांतो से भटक चुकी हैं| भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने आई पार्टी आज खुद भ्रष्टाचार के दलदल में हैं| हमने संविधान के प्रावधानों के तहत बीजेपी में विलय का फैसला किया हैं|”
पंजाब सरकार पर मंडराते खतरे के बादल:-
इस बगावत का सबसे गहरा असर पंजाब में देखने को मिल रहा हैं| पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इन सांसदों को “पंजाब के गद्दार” करार दिया हैं| लेकिन असल चिंता नंबर गेम की हैं:
- विधायकों में टूट का डर:- जानकारों का मानना हैं कि राघव चड्ढा और संदीप पाठक का पंजाब के विधायकों पर गहरा प्रभाव हैं| यदि राज्यसभा की तरत विधानसभा में भी दो-तिहाई विधायक (92 में से 62) टूटते हैं, तो मान सरकार गिर सकती हैं|
- ऑपरेशन लोटस:- विपक्ष (कांग्रेस और अकाली दल) का दावा हैं कि यह ‘ऑपरेशन लोटस’ का अगला चरण हैं और जल्द ही पंजाब में सत्ता परिवर्तन देखने को मिल सकता हैं|
पार्टी के भीतर ‘कोल्ड वॉर’ और टूट की इनसाइड स्टोरी:-
1. संगठन में दरार और संदीप पाठक की भूमिका:-
आम आदमी पार्टी के संगठन की रीढ़ माने जाने वाले डॉ. संदीप पाठक का बीजेपी में जाना अरविंद केजरीवाल के लिए सबसे बड़ा झटका हैं| सूत्रों का कहना हैं कि पिछले कई महीनों से पार्टी के भीतर ‘पुराने बनाम नए’ नेताओं की जंग चल रही थी| राघव चड्ढा और संदीप पाठक जैसे युवा चेहरे पार्टी के फैसलों में अधिक हिस्सेदारी चाहते थे, लेकिन ‘हाईकमान’ के कुछ करीबी नेताओं के दखल से वे नाराज चल रहे थे| संगठन मंत्री होने के नाते पाठक के पास हर राज्य के कार्यकर्ताओं का डेटा और नेटवर्क हैं, जिसका सीधा फायदा अब बीजेपी को मिलेगा|
2. पंजाब के विधायकों में मची खलबली:-
राज्यसभा सांसदों के इस कदम के बाद चंडीगढ़ से लेकर दिल्ली तक बैठकों का जारी हैं| बताया जा रहा हैं कि पंजाब के करीब 25 से 30 विधायक राघव चड्ढा के संपर्क में हैं| यदि यह गुट बढ़ता हैं, तो भगवंत मान सरकार के लिए बहुमत साबित करना मुश्किल हो जाएगा| दिल्ली शराब नीति मामले के बाद से ही पार्टी के भीतर एक ऐसा धड़ा तैयार हो गया था जो नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहा था| बीजेपी की सदस्यता लेने वाले इन सांसदों का ट्रक हैं कि वे राज्य के विकास के लिए केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं|
3. कार्यकर्ताओं का टुटा भरोसा और भविष्य की राह:-
सोशल मीडिया पर ‘AAP’ समर्थकों के बीच भारी गुस्सा देखा जा रहा हैं| राघव चड्ढा के इंस्टाग्राम और एक्स (Twitter) हैंडल पर अनफालो करने वालों की बाढ़ आ गई हैं| विश्लेषकों का मानना हैं कि यदि AAP इस बगावत को तुरंत नहीं संभालती, तो आने वाले नगर निगम और अन्य राज्यों के चुनावों में पार्टी का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता हैं| वहीं, बीजेपी इन 7 सांसदों के जरिए पंजाब में अपनी पैठ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही हैं, जहाँ वह अब तक एक ‘जूनियर पार्टनर’ की भूमिका में थी|
AAP का पलटवार: “ये गद्दारी हैं”
संजय सिंह और मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कड़े शब्दों में इसकी निंदा की हैं| मान ने कहा की, “इन लोगों को पंजाब की जनता ने नहीं, पार्टी ने चुनकर भेजा था| इन्होने अपनी खाल बचाने के लिए बीजेपी के सामने घुटने टेके हैं| पंजाब की जनता इन्हें कभी माफ़ नहीं करेगी|”
1. क्या इन सांसदों की सदस्यता रद्द होगी?
संविधान की 10वीं अनुसूची के अनुसार, यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई (2/3) विधायक या सांसद एक साथ दूसरी पार्टी में विलय करते हैं, तो उनकी सदस्यता रद्द नहीं होती| AAP के 10 में से 7 सांसद साथ गए हैं, इसलिए वे तकनीकी रूप से सुरक्षित हैं|
2. पंजाब सरकार के पास कितनी सीटें हैं?
पंजाब में AAP के पास 92 विधायक हैं| सरकार गिराने के लिए कम से कम 62 विधायकों का टूटना ज़रूरी हैं|
3. क्या अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ेंगी?
निश्चित रूप से| संगठन के सबसे मजबूत स्तंभों (चड्ढा और पाठक) का जाना केजरीवाल के लिए एक बड़ा व्यक्तिगत और राजनीतिक झटका हैं|
