दिल्ली पालम अग्निकांड: राम चौक में 5 मंजिला इमारत बनी ‘यमलोक’

नई दिल्ली,पालम: राजधानी दिल्ली के पालम इलाके से एक बेहद हृदयविदारक खबर सामने आई हैं| पालम के व्यस्त रिहायशी इलाके ‘राम चौक’ में स्थित एक पांच मंजिला इमारत में भीषण आग लगने से पुरे इलाके में कोहराम मच गया| इस दर्दनाक हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी हैं, जिनमे बदकिस्मती से 3 मासूम बच्चे भी शामिल हैं|
कैसे शुरू हुआ मौत का तांडव?
जानकारी के मुताबिक, यह आग सुबह तकरीबन 6:30 बजे आसपास लगी थी| बताया जा रहा हैं कि आग की शुरुआत इमारत के बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर से हुई थी| इमारत के बेसमेंट में कॉस्मेटिक का एक बड़ा गोदाम था और ग्राउंड फ्लोर पर भी सौंदर्य प्रसाधनों (Cosmetics) की दुकान थी| कॉस्मेटिक उत्पादों में मौजूद केमिकल और ज्वलनशील पदार्थो की वजह से आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और पूरी पाँच मंजिला इमारत को अपनी चपेट में ले लिया|
एक ही परिवार के 22 लोग रहते थे
चश्मदीदों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस इमारत की दूसरी और तीसरी मंजिल रिहायशी थी, जहाँ एक ही परिवार के लगभग 22 लोग रहा करते थे| हादसे के वक्त परिवार के कुछ सदस्य बाहर गए हुए थे, लेकिन फिर भी 10 से ज्यादा लोग इमारत के अंदर ही फंसे रह गए| जैसे-जैसे ऊपर की तरफ बढ़ी, लोग जान बचाने के लिए छत और छज्जों की तरफ भागे|
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रेस्क्यू ऑपरेशन: 30 से ज्यादा दमकल गाड़ियाँ मौके पर
आग इतनी भयावह थी कि इसे बुझाने के लिए दिल्ली फायर सर्विस की 30 से ज्यादा गाड़ियाँ मौके पर पहुंची| संकरी गलियां होने के कारण दमकल कर्मियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा| फायर ब्रिगेड ने हाईड्रोलिक मशीनों का इस्तेमाल करके लोगो को खिडकियों और छत से निकालने की कोशिश की|
स्थानीय लोगों ने भी बहादुरी दिखाते हुए पड़ोस की इमारत की दीवार तोड़कर फंसे हुए लोगों को बचाने का प्रयास किया, लेकिन धुआं इतना घना और काला था कि अंदर घुसना लगभग नामुमकिन हो गया था|
7 की मौत, कई अभी भी अस्पताल में भर्ती
अब तक की जानकरी के अनुसार, इस दर्दनाक हादसे ने 7 लोगो की जान ले ली हैं| रेस्क्यू टीम ने 10 से जयादा लोगो को जख्मी हालत में बाहर निकाला हैं, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया| अस्पताल में भर्ती कुछ लोगों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई हैं, जिससे मृतकों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका हैं|
चश्मदीदों की जुबानी: “वो मदद के लिए चिल्लाते रहे”
मौके पर मौजूद लोगो ने बताया कि उन्होंने कई लोगो को बालकनी और छज्जों पर मदद के लिए हाथ हिलते देखा था| लेकिन जैसे-जैसे काला धुआं और आम की लपटें बढ़ीं, वे लोग पीछे हटने को मजबूर हो गए और दम घुटने की वजह से अंदर ही गिर गए| इसके बाद वे दोबारा नजर नहीं आए|
प्रशासन की कार्रवाई और कुलिंग प्रोसेस
फ़िलहाल आग पर काबू पा लिया गया हैं, लेकिन इमारत के कुछ हिस्सों में अभी भी ‘कुलिंग’ का काम जारी हैं ताकि आग दोबारा न भडके| आग की तपन से इमारत की हालत काफी जर्जर हो चुकी हैं, इसलिए सर्च ऑपरेशन बहुत सावधानी से चलाया जा रहा हैं| दिल्ली पुलिस और फायर विभाग अब आग लगने के असली कारणों की जांच कर रहे हैं| प्राथमिक जाँच में शार्ट सर्किट या बेसमेंट में रखे केमिकल्स को मुख्य वजह माना जा रहा हैं|
रिहायशी इलाकों में गोदामों पर उठे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर प्रशासन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं| सवाल यह हैं कि एक रिहायशी इलाके में, जहाँ इतने परिवार रहते हैं, वहां बेसमेंट में ज्वलनशील कॉस्मेटिक उत्पादों का गोदाम कैसे चल रहा था? क्या इस बिल्डिंग के पास फायर एनओसी (NOC) थी? यह अब गहन जाँच का विषय हैं|
पालम का यह हादसा पूरी दिल्ली के लिए एक सबक हैं कि सुरक्षा नियमों को नजरअंदाज करना कितना घातक हो सकता हैं|
ताजा अपडेट: ग्राउंड जीरो से नई जानकारियां
ताजा मिल रही खबरों और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर इस हादसे की कुछ और भयावह परतें सामने आई हैं:
- धुएं का ‘साईलेंट किलर’ बनना:- बताया जा रहा हैं कि ज्यादातर मौतें आग से जलने के बजाय दम घुटने (Asphyxiation ) के कारण हुई हैं| कॉस्मेटिक सामान में प्लास्टिक और केमिकल्स होने की वजह से धुआं इतना जहरीला था कि सीढ़ियों पर चढ़ते ही लोग बेहोश हो गए|
- शार्ट सर्किट की आशंका:- शुरूआती जांच और स्थानीय लोगों का कहाँ हैं कि आग सबसे पहले बिजली के मीटर बोर्ड में हुए शार्ट सर्किट से लगी, जिसने पास ही रखे ज्वलनशील कॉस्मेटिक सामान को अपनी चपेट में ले लिया|
- रेस्क्यू में ‘सैकड़ों हाथ’:- दमकल की 30 गाड़ियों के साथ-साथ स्थानीय युवाओं ने अपनी जान जोखिम में डालकर खिड़कियों के शीशे तोड़े और लोहे की ग्रिल काटी, जिससे करीब 10-12 लोगों को सुरक्षित निकाला जा सका|
- इमारत की अवैध संरचना:- सूत्रों के मुताबिक, यह 5 मंजिला इमारत काफी घनी आबादी में बनी हैं और इसमे एग्जिम (निकासी) का केवल एक ही रास्ता था, जो आग की वजह से पूरी तरह ब्लॉक हो गया था|
‘मौत का गोदाम’ और प्रशासन पर सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर दिल्ली के रिहायशी इलाकों में चल रहे अवैध कमर्शियल एक्टिविटी की पोल खोल दी हैं:
- अवैध स्टोरेज:- रिहायशी बिल्डिंग के बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर भारी मात्रा में कॉस्मेटिक और परफ्यूम का स्टॉक रखा था, जो आग को भड़काने के लिए ईंधन का काम कर गया|
- फायर सेफ्टी का अभाव:- इमारत में न तो फायर एक्सटिंग्विशर (आग बुझाने वाले यंत्र) थे और न ही कोई इमरजेंसी अलार्म|
- संकरी गलियों की चुनौती:- पालम का यह इलाका इतना संकरा हैं कि बड़ी हाईड्रोलिक मशीनों को इमारत तक पहुँचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी, जिससे कीमती समय बर्बाद हुआ|
चश्मदीदों की आँखों देखी: “वो आखिरी चीखें”
पड़ोस में रहने वाले एक चश्मदीद ने बताया, “ऊपरी मंजिल पर फंसे लोग खिड़कियों से हाथ हिला रहे थे और अपने बच्चो को बचाने की गुहार लगा रहे थे| हमने सीढी लगाकर चढ़ने की कोशिश की, लेकिन जहरीले धुंए ने हमें पीछे धकेल दिया| देखते ही देखते सब कुछ शांत हो गया|”
वर्तमान स्थिति: कुलिंग और सर्च ऑपरेशन
फ़िलहाल दिल्ली फायर सर्विस ने आग पर पूरी तरह काबू पा लिया हैं, लेकिन ‘कुलिंग प्रोसेस’ अभी भी जारी हैं ताकि मलबे के नीचे दबी कोई चिंगारी दोबारा न भड़क जाए| पुलिस ने बिल्डिंग के मालिक के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी हैं और मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया हैं|
“क्या रिहायशी इलाकों में अवैध गोदामों पर बैन लगना चाहिए?” आपकी क्या राय हैं कमेंट में हमारे साथ जरुर साझा करें
