नेपाल आम चुनाव 2026: ‘Gen Z’ क्रांति के बाद लोकतंत्र की बड़ी परीक्षा

काठमांडू: हिमालय की गोद में बसे नेपाल में आज सुबह 7 बजे से ही मतदान केन्द्रों पर लंबी कतारें देखि जा रही हैं| यह कोई साधारण चुनाव नहीं हैं; यह उस ‘आक्रोश’ का परिणाम हैं जो सितंबर 2025 में नेपाल की सड़कों पर उतरा था| लगभग 1.89 करोड़ मतदाता आज 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) के भाग्य का फैसला कर रहे हैं|

1. चुनाव की पृठभूमि: क्यों हो रहे हैं ये ‘Snap Polls’?

सितंबर 2025 ने नेपाल ने एक ऐसा आंदोलन देखा जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा| तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार द्वारा सोशल मीडिया (You Tube, TikTok, Facebook) पर लगाए गए प्रतिबंध और भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘Gen Z’ (युवा पीढ़ी) ने सड़कों पर कब्जा कर लिया था|

  • हिंसक प्रदर्शन: उस दौरान हुई हिंसा में 70 से अधिक लोगों की जान गई थी|
  • तख्तापलट जैसी स्थिति: भारी दबाव के बाद ओली सरकार को इस्तीफा देना पड़ा और पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार बनाई गई, जिसका मुख्य उद्देश्य 6 महीने के भीतर निष्पक्ष चुनाव कराना था|

2. मुख्य मुकाबला: पुराने दिग्गज बनाम नया चेहरा

इस बार लड़ाई ‘विचारधारा’ से ज्यादा ‘पीढ़ियों’ के बीच हैं:

  • रवि लामिछाने और बालेन शाह (RSP): राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने काठमांडू के लोकप्रिय पूर्व मेयर और रैपर बालेन शाह को अपना प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित किया हैं| युवाओं के बीच बलेन की लोकप्रियता वैसी ही हैं जैसी कभी किसी बड़े क्रांतिकारी की होती थी|
  • गगन थापा (नेपाली कांग्रेस): नेपाली कांग्रेस ने भी अपनी रणनीति बदलते हुए युवाओं को रिझाने के 49 वर्षीय गगन थापा को आगे किया हैं|
  • केपी शर्मा ओली (CPN-UML): पुराने दिग्गजों में ओली अभी भी मैदान में हैं, लेकिन इस बार वे अपनी पारंपरिक सीट (झापा-5) पर बालेन शाह से सीधी चुनौती का सामना कर रहे हैं|

3. ‘Gen Z’ का असर: पहली बार के मतदाता

इस चुनाव में करीब 8 लाख नए मतदाता जुड़े हैं, जो उसी पीढ़ी से आते हैं जिसने पिछले साल का आंदोलन शुरू किया था|

  • मुद्दे: इस बार बिजली, पानी या सड़क मुख्य मुद्दे नहीं हैं| युवा डिजिटल फ्रीडम, रोजगार (Migration रोकना) और भ्रष्टाचार मुक्त ब्यूरोक्रेसी की मांग कर रहे हैं|
  • सोशल मीडिया का प्रभाव: चुनाव प्रचार का 80% हिस्सा इस बार डिजिटल प्लेटफ़ार्म्स पर हुआ हैं, जिससे पुरानी पार्टियों के लिए चुनौती बढ़ गई हैं|

4. भारत और चीन की नजर

नेपाल के चुनाव में हमेशा की तरह भारत और चीन की गहरी दिलचस्पी हैं|

  • चीन: केपी ओली की पार्टी के साथ चीन के संबंध बेहतर माने जाते हैं|
  • भारत: भारत शांति और स्थिरता चाहता हैं और नेपाली कांग्रेस जैसे लोकतांत्रिक दलों के साथ संतुलन बनाए हुए हैं| हालांकि, बालेन शाह जैसे ‘न्यूट्रल’ चेहरे के आने से दोनों पड़ोसी देशों को अपनी विदेश नीति पर फिर से विचार करना पड़ सकता हैं|

5. आज की ताजा अपडेट (Live Status)

  • वोटिंग: मतदाता शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा हैं| पहाड़ी इलाकों में मतपेटियों को हेलीकाप्टर से सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की व्यवस्था की गई हैं|
  • सुरक्षा: पुरे देश में 3.4 लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं|
  • रिजल्ट: चुनाव आयोग ने वादा किया हैं कि 24 घंटे के भीतर शुरूआती रुझान आने शुरू हो जाएंगे|

6. ‘बालेन फैक्टर’ और निर्दलीय उम्मीदवारों का उभार

इस चुनाव की सबसे बड़ी विशेषता यह हैं कि पहली बार नेपाल के पारंपरिक ‘पार्टी सिस्टम’ को निर्दलीय (Independent) और छोटी पार्टियों से कड़ी चुनौती मिल रही हैं| काठमांडू के मेयर बालेन शाह ने जिस तरह से नगर निगम में काम करके दिखाया, उसने पुरे देश के युवाओं को यह भरोसा दिलाया हैं कि बिना किसी बड़ी राजनैतिक विरासत के भी व्यवस्था बदती जा सकती हैं|

बालेन शाह का ‘हथौड़ा’ चुनाव चिन्ह इस बार पुरे नेपाल में गूंज रहा हैं| उन्होंने वादा किया हैं कि वे नेपाल को ‘ब्रेन ड्रेन’ (प्रतिभा पलायन) से बचायेंगे| हर साल लाखों नेपाली युवा खाड़ी देशों और भारत में मजदूरी के लिए जाते हैं; बालेन का विजय उन्हें नेपाल में ही आईटीआई और कृषि स्टार्टअप्स के जरिए रोकने का हैं| यदि वे जीतते हैं, तो यह दक्षिण एशिया में किसी ‘सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर’ की पहली बड़ी राजनीतिक जीत होगी|

7. भारत-नेपाल संबंध: रोटी-बेटी से लेकर डिजिटल कनेक्टिविटी तक

भारत के लिए नेपाल का यह चुनाव सुरक्षा और कूटनीति के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील हैं| पिछले कुछ वर्षो में ‘कालापानी’ और ‘लिपुलेख’ जैसे सीमा विवादों ने रिश्तों में खटास पैदा की थी| लेकिन अब, नई पीढ़ी के नेता ‘बॉर्डर पॉलिटिक्स’ के बजाय ‘इकोनामी कनेक्टिविटी’ की बात कर रहे हैं|

  • पनबिजली (Hydropower): नेपाल अब भारत को भारी मात्र में बिजली निर्यात कर रहा हैं, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली हैं| नए नेता इस व्यापार को और बढ़ाना चाहते हैं|
  • यूपीआई (UPI) और डिजिटल पेमेंट: भारत और नेपाल के बीच डिजिटल भुगतान शुरू होने से पर्यटन में बड़ी क्रांति आई हैं| चुनाव में यह एक बड़ा मुद्दा हैं कि कैसे नेपाल को ‘कैशलेस इकोनामी’ बनाया जाए|

8. राजशाही की वापसी का ‘मृगतृष्णा’ (Monarchy Debates)

दिलचस्प बात यह भी हैं कि चुनावों के बीच एक छोटा वर्ग पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह की वापसी और नेपाल को फिर से ‘हिंदू राष्ट्र’ घोषित करने की मांग कर रहा हैं| हालांकि, युवाओं का बड़ा हिस्सा राजशाही के बजाय एक आधुनिक और धर्मनिरपेक्ष (Secular) लोकतंत्र के पक्ष में खड़ा दिखाई देता हैं|

9. चुनाव के बाद की चुनौतियाँ

वोटिंग खत्म होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती ‘हंग पार्लियामेंट’ (त्रिशंकु संसद) की होगी| अगर किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला, तो फिर से वही पुरानी ‘गठबंधन की राजनीति’ शुरू हो सकती हैं, जिससे नेपाल पिछले 15 सालों से जूझ रहा हैं| जनता को डर हैं कि कही सत्ता की बंदरबांट में ‘Gen Z’ का यह आंदोलन फिर से नेताओं की फाइलों में दबकर न रह जाए|

आज शाम 5 बजे जब पोलिंग बूथ बंद होंगे, तो नेपाल एक नई उम्मीद के साथ सोएगा| यह चुनाव केवल प्रधानमंत्री चुनने के लिए नहीं, बल्कि नेपाल की आत्मा को फिर से खोजने के लिए हैं|

 

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