पश्चिमी एशिया (Middle East) इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठा हैं| ईरान के सुप्रीम लीडर आयतउल्ला खामेनेई के निधन के बाद उपजी राजनीतिक शुन्यता और उसके तुरंत बाद इसरायल व अमेरिका (US) द्वारा किए गए रणनीतिक हमलों ने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की कगार पर खड़ा कर दिया हैं| यह संकट केवल कुटनीतिक बयानों तक सीमित नही हैं, बल्कि इसका असर अब भारत की गलियों, हवाई अड्डों और आम आदमी की जेब पर दिखने लगा हैं|
1. खामेनेई का निधन और भड़कती हिंसा की चिंगारी:-
ईरान में सत्ता के केंद्र रहे आयतउल्ला खामेनेई की मौत के बाद ईरान के भीतर और बाहर उनके समर्थकों में भारी आक्रोश हैं| ईरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता पर सीधा प्रहार बताया हैं| अमेरिका और इसरायल का तर्क हैं कि वे ‘प्रिवेंटिव स्ट्राइक’ (बचाव के लिए हमला) कर रहे हैं ताकि ईरान समर्थित उग्रवादी गुट सक्रिय न हो सकें| लेकिन धरातल पर स्थिति यह हैं कि तेहरान से लेकर तेल अवीव तक आसमान मिसाईलों और ड्रोन की आवाजों से गूंज रहा हैं|
2. भारत के कश्मीर में तनाव और डिजिटल ब्लैकआउट:-
मिडिल ईस्ट की इस आग की आंच भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर तक पहुँच गई हैं|
विरोध प्रदर्शन: कश्मीर के कई हिस्सों, विशेषकर शिया बहुत इलाकों में खामेनेई के समर्थन में और इसरायल-अमेरिका के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं|
सुरक्षा उपाय: स्थिति की संवेदनशीलता और अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए प्रशासन ने एहतियातन इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं|
कर्फ्यू: कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई संवेदनशील इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया हैं| सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया हैं ताकि सीमा पार से इस तनाव का फायदा न उठाया जा सके|
3. विमान क्षेत्र ठप: उड़ानें रद्द, यात्री परेशान:-
युद्ध के खतरे को देखते हुए अंतर्राष्ट्रीय हवाई क्षेत्र (Airspace) असुरक्षित हो गया हैं|
एयर इंडिया और इंडिगो का फैसला: भारत की प्रमुख एयरलाइन्स ने दुबई, इसरायल (तेल अवीव) और कतर जाने वाली अपनी सभी उड़ानें तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी हैं|
रूट डायवर्जन: जो उड़ानें यूरोप की ओर जा रही हैं, उन्हें अब लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा हैं, जिससे ईंधन की खपत बढ़ गई हैं और आने वाले दिनों में हवाई टिकटों के दाम आसमान छू सकते हैं| हजारों भारतीय यात्री खाड़ी देशों में फंसे हुए हैं, जिनके लिए विदेश मंत्रालय जल्द ही एडवाइजरी जारी कर सकता हैं|
4. वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल का संकट:-
मिडिल ईस्ट दुनिया की ‘एनर्जी बास्केट’ हैं| यदि यह युद्ध पूर्ण पैमाने पर बदलता हैं, तो:
कच्चा तेल (Crude Oil): सप्लाई चेन बाधित होने से कच्चे तेल की कीमते $100 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं| भारत अपनी जरूरत का 80%तेल आयात करता हैं, जिससे देश में पेट्रोल-डीजल और माल ढुलाई महंगी हो जाएगी|
मुद्रास्फीति (Inflation): परिवहन लागत बढ़ने से खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ना तय हैं|
5. रणनीतिक चिंताएं: भारत का रुख:-
भारत के लिए यह स्थिति ‘दोधारी तलवार’ पर चलने जैसी हैं|
ईरान के साथ संबंध: चाबहार पोर्ट और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से ईरान भारत महत्वपूर्ण साझेदार हैं|
प्रवासी भारतीय: खाड़ी देशों में लगभग 80 लाख से ज्यादा भारतीय काम करते हैं| उनकी सुरक्षा भारत सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता हैं|
इसरायल के साथ संबंध: भारत और इजरायल के बीच रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में मजबूत साझेदारी हैं|
6. भारतीय अर्थव्यवस्था पर ‘युद्ध’ की मार:-
युद्ध की खबरों ने भारतीय बाजारों में भारी हलचल पैदा कर दी हैं| निवेशक डरे हुए हैं और बाजार से पैसा निकाल रहे हैं|
शेयर बाजार में गिरावट: आज सेंसेक्स और निफ्टी में 1,000 पॉइंट्स से ज्यादा की भारी गिरावट दर्ज की गई| डिफेंस और आयल कम्पनियों को छोडकर लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं|
सोना बना ‘सुरक्षित निवेश’: शेयर बाजार की गिरावट के कारण निवेशकों का भरोसा सोने पर बढ़ गया हैं| आज सोने की कीमतों में प्रति 10ग्राम पर रु.2,000 से ज्यादा का उछाल देखा गया हैं|
विशेषज्ञों का मानना हैं कि यदि तनाव जारी रहा तो सोना जल्द ही अपने एतिहासिक स्तर को पार कर जाएगा|
7. कुटनीतिक चुनौतियाँ: भारत का ‘बैलेंसिंग एक्ट’:-
भारत के लिए यह स्थिति बहुत नाजुक हैं| भारत के इजरायल के साथ गहरे रक्षा संबंध हैं, जबकि ईरान के साथ ‘चाबहार पोर्ट’ जैसी रणनीतिक परियोजनाएं जुड़ी हैं|
विदेश मंत्रालय की भूमिका: भारत सरकार ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की हैं| प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा हैं| भारत की प्राथमिकता खाड़ी देशों में रहने वाले 80 लाख से अधिक भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हैं|
8. सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों का अलर्ट:-
भारत के गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को अलर्ट जारी किया हैं| विशेष रूप से उन शहरों में सुरक्षा बढ़ा दी गई हैं जहाँ इसरायली दूतावास या यहूदी केंद्र (जैसे मुम्बई का नरीमन हॉउस) स्थित हैं| दिल्ली में इसरायली दूतावास के बाहर सुरक्षा घेरा तीन गुना कर दिया गया हैं|
क्या यह तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत हैं?
दुनिया भर के रक्ष विशेषज्ञ चिंतित हैं कि यदि रूस और चीन ने ईरान का खुला समर्थन किया, तो यह क्षेत्रीय संघर्ष एक वैश्विक महायुद्ध में बदल सकता हैं| भारत जैसे उभरते देश के लिए, यह संकट उसकी आर्थिक विकास दर(GDP) को धीमा कर सकता हैं| शांति ही एकमात्र रास्ता हैं, लेकिन फ़िलहाल बन्दूकों की गूंज कूटनीति पर भारी पड़ती दिख रही हैं|
कुछ मुख्य बिंदु:-
- ईरान में सुप्रीम लीडर की मौत के बाद इजरायल-US के घातक हमले|
- कश्मीर में विरोध प्रदर्शनों के बाद इंटरनेट बंद और कर्फ्यू|
- मिडिल ईस्ट जाने वाली सभी भारतीय उड़ाने रद्द|
- शेयर बाजार क्रैश, सोना रिकार्ड महंगा|
- भारत सरकार का खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों के लिए हाई अलर्ट|
