Breaking News: मध्य पूर्व युद्ध की कगार पर! अमेरिका और इसराइल के ईरान पर भीषण हमले

पिछले कई हफ्तों से जारी तनाव अब तक खतरनाक मोड़ ले चूका हैं| आज 28 फरवरी 2026 को, अमेरिका और इसरायल ने संयुक्त रूप से ईरान के कई शहरों पर सैन्य हमले शुरू कर दिए हैं| राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे “मेजर कॉम्बैट ऑपरेशन” का नाम दिया हैं, जिसका उद्देश्य ईरान के परमाणु ठिकानों और मिसाईल क्षमता को पूरी तरह नष्ट करना हैं|

मुख्य घटनाक्रम (Key Highlights):-

संयुक्त हमला: अमेरिकी लड़ाकू विमानों और इजरायली सेना ने तेहरान सहित ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया हैं| राजधानी तेहरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के कार्यालय के पास धमाकों की खबरें हैं|

वार्ता की विफलता: जेनेवा और ओमान में चल रही परमाणु वार्ता (Nuclear Talks) बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई| अमेरिका ने ईरान से युरेनियम संवर्धन (Enrichment) पूरी तरह बंद करने और बैलिस्टिक मिसाईल कर्यक्रम को रोकने की मांग की थी, जिसे ईरान ने अपनी “रेड लाइन” बताते हुए खारिज कर दिया|

ट्रंप का कड़ा रुख: राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि ईरान “नेक नियत” से बातचीत नहीं कर रहा था और वह गुप्त रूप से परमाणु हथियार बनाने की कोशिश जारी रखे हुए था| उन्होंने ईरानी जनता से अपनी सरकार के खिलाफ खड़े होने का आवाहन किया हैं|

ईरान की जवाबी कार्यवाई: ईरान ने हमले के जवाब में इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाईलें और ड्रोन दागने शुरू कर दिए हैं|

संघर्ष के पीछे के बड़े कारण:-

परमाणु कर्यक्रम का पुनरुद्धार: अमेरिकी ख़ुफ़िया रिपोर्टों का दावा हैं कि ईरान ने 2025 के हमलों के बाद अपने परमाणु ठिकानों को फिर से सक्रिय कर लिया था|

आंतरिक विद्रोह: ईरान में पिछले कई महीनों से सरकार विरोधी प्रदर्शन (Protests) चल रहे हैं| अमेरिका ने इन प्रदर्शनों का खुलकर समर्थन किया हैं और ईरान पर मानवाधिकारों के उल्लंधन का आरोप लगाया हैं|

क्षेत्रीय अस्थिरता: लाल सागर (Red Sea) संकट और प्रॉक्सी समूहों ( जैसे हुती और हिजबुल्ला) को ईरान के समर्थन ने तनाव को चरम पर पंहुचा दिया हैं|

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव इस युद्ध की आहट से वैश्विक बाजारों में हडकंप मच गया हैं|

कच्चा तेल (Crude Oil): ब्रेंट क्रूड की कीमते $70 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं और आशंका हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद होने पर यह $100 के पार जा सकता हैं|

शेयर बाजार: दुनिया भर के शेयर बाजारों में आज भारी गिरावट दर्ज की गई हैं|

आगे क्या होगा?

दुनिया भर के नेता संयम बरतने की अपील कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हालात बता रहे हैं कि यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध (Regional War) में बदल सकता हैं| ईराक ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया हैं और अमेरिका ने अपने नागरिकों को तत्काल इजरायल छोड़ने की सलाह दी हैं|

विशेषज्ञों की राय:“यह 2003 के इराक युद्ध के बाद इस क्षेत्र में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य हस्तक्षेप हो सकता हैं| यदि कूटनीति तुरंत सक्रिय नहीं हुई, तो परिणाम विनाशकारी होंगे|”

ईरान और अमेरिकी के बीच चल रहा यह युद्ध भारत के लिए एक गंभीर दोहरी चुनौती (Double Whammy) की तरह हैं| भारत के ईरान और अमेरिका दोनों के साथ गहरे संबंध हैं, इसलिए इसका असर न केवल कूटनीति पर, बल्कि आपकी जेब पर भी पड़ेगा|

भारत पर होने वाले मुख्य आर्थिक प्रभावों का विवरण दिया गया हैं:-

1. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल (Crude Oil Crisis):-

भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85% आयात करता हैं|

महंगाई की मार: अगर खाड़ी देशों में तनाव बढ़ता हैं, तो कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल को पार कर सकती हैं| इसका सीधा असर भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर पड़ेगा|

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): दुनिया का 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता हैं| अगर ईरान इसे ब्लॉक करता हैं, तो भारत में सप्लाई चेन पूरी तरह ठप हो सकती हैं|

2. व्यापार और चाबहार पोर्ट (Strategic Projects):-

चाबहार बन्दरगाह: भारत ने ईरान में चाबहार पोर्ट पर भारी निवेश किया हैं ताकि मध्य एशिया और रूस तक पहुँच बनाई जा सके| युद्ध की स्थिति में यह प्रोजेक्ट ठंडे बसते में जा सकता हैं, जिससे भारत का व्यापारिक मार्ग बाधित होगा|

निर्यात में गिरावट: भारत ईरान को बड़े पैमाने पर बासमती चावल, चाय, कॉफ़ी और दवाईयां निर्यात करता हैं| युद्ध के कारण ये भुगतान अटक सकते है और निर्यातकों को भारी नुकसान हो सकता हैं|

3. शेयर बाजार और रुपया (Market Volatility):-

शेयर बाजार: अनिश्चितता के कारण विदेशी निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश (जैसे सोना) की ओर भागेंगे, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट आ सकती हैं|

रूपये की कमजोरी: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया और गिर सकता हैं, जिससे भारत का आयात (जैसे इलेक्ट्रानिक्स और खाद्य तेल) और भी महंगा हो जाएगा|

4. भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा (Diaspora Concerns):-

खाड़ी देशों (UAE, क़तर,सऊदी अरब) में लगभग 90 लाख भारतीय रहते हैं| अगर यह युद्ध ईरान से निकलकर पुरे मिडिल ईस्ट में फैलता हैं, तो इन लोगों की सुरक्षा और उनके द्वारा भारत भेजे जाने वाले पैसे (Remittances) पर गहरा संकट आ जाएगा|

सारांश तालिका: भारत पर प्रभाव क्षेत्र संभावित प्रभाव, प्रभाव का स्तर पेट्रोल-डीजल कीमतों में 15-20%की बढ़ोतरी – उच्च

शेयर बाजार भारी बिकवाली और अस्थिरता – उच्च

रुपया डॉलर के मुकाबले रिकार्ड गिरावट – मध्यम

निर्यात (Export) चावल और चाय के व्यापार में कमी – मध्यम

भारत के लिए यह स्थिति ‘आग के बीच चलने’ जैसी हैं| भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रूस या अन्य देशो से तेल के वैकल्पिक इंतजाम तेज करने होंगे|

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